डब्ल्यूआरएस राजकीय महाविद्यालय देहरी में शुक्रवार को कारगिल विजय दिवस के अवसर पर एक विशेष स्मृति कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य भारतीय सेना के वीर जवानों के शौर्य, बलिदान और देशभक्ति को सम्मान देना था। इस आयोजन को महाविद्यालय की एनसीसी और एनएसएस इकाइयों ने संयुक्त रूप से प्रस्तुत किया, जिसमें छात्र-छात्राओं ने सक्रिय भागीदारी दिखाई।

कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रध्वज फहराकर की गई, जिसके बाद एनसीसी कैडेट्स ने अनुशासित एवं प्रभावशाली मार्च पास्ट प्रस्तुत किया। यह परेड केवल एक सैन्य अनुशासन की झलक नहीं थी, बल्कि इसने दर्शकों के भीतर गर्व और देश के प्रति सम्मान की भावना भी जगाई।
इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित कैप्टन हरि सिंह पठानिया ने कारगिल युद्ध के अनुभवों को साझा किया और वीर सैनिकों के साहसिक योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि विषम परिस्थितियों में भी हमारे सैनिकों ने जिस निडरता और समर्पण के साथ मातृभूमि की रक्षा की, वह हमेशा प्रेरणास्त्रोत रहेगा। उनका बलिदान अमूल्य है और उसे याद रखना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।

कार्यक्रम में एनसीसी और एनएसएस से जुड़े छात्रों ने कारगिल युद्ध की पृष्ठभूमि, घटनाक्रम और सैनिकों की वीरता पर आधारित प्रेरणादायक भाषण प्रस्तुत किए। इसके साथ ही छात्रों ने एक सशक्त नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से युद्ध के दौरान भारतीय सैनिकों के संघर्ष और धैर्य को मंच पर जीवंत कर दिया। इस नाटक ने दर्शकों की आंखें नम कर दीं और समूचा सभागार देशभक्ति के नारों से गूंज उठा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. सपना बख्शी ने की। इस अवसर पर एएनओ लेफ्टिनेंट डॉ. शशि कुमार, एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी रेखा और रोहित, तथा शिक्षकगण नीरज कुमार, विकास बेसिन और डॉ. सुरिंदर कुमार भी उपस्थित रहे। इन सभी ने अपनी सक्रिय भागीदारी से कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान दिया और छात्रों का उत्साहवर्धन किया।

कार्यक्रम का समापन कारगिल युद्ध में शहीद हुए वीर सैनिकों की स्मृति में दो मिनट के मौन और पुष्पांजलि अर्पण के साथ किया गया। इस आयोजन ने यह स्पष्ट किया कि भारत के युवा अपने सैनिकों के बलिदान को न केवल याद रखते हैं, बल्कि उसे अपनी प्रेरणा का स्रोत भी मानते हैं।
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