पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने केंद्र सरकार की रोजगार योजनाओं को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा है कि केंद्र ने महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना का सिर्फ नाम बदला है, जबकि हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने तो संस्थान ही बंद कर दिए हैं। मंडी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि कांग्रेस बेवजह यह शोर मचा रही है कि योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाकर उसका स्वरूप बदल दिया गया है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि जब भी नई सरकार बनती है, वह अपनी नीतियों और योजनाओं को आगे बढ़ाती है और जमीनी स्तर से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर उनमें सुधार किए जाते हैं। इसी प्रक्रिया के तहत केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने संसद में एक नया एक्ट लाकर योजना का नाम ‘विकसित भारत रोजगार आजीविका मिशन’ रखा है, जिसे वीबीजी-रामजी 2025 कहा जा रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष इसका विरोध कर रहा है, जबकि इस विरोध का कोई ठोस आधार नहीं है।
उन्होंने कहा कि देश आजाद होने के बाद से ही रोजगार योजनाओं के नाम बदलते रहे हैं। अंग्रेजों के दौर में भी रोजगार से जुड़ी योजनाएं थीं। वर्ष 1989 में कांग्रेस सरकार जवाहर रोजगार योजना लेकर आई, जो 1999 में जवाहर समृद्धि योजना बनी, 2001 में पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना, 2006 में नरेगा और 2009 में मनरेगा के नाम से जानी गई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में भी नाम बदले गए, लेकिन योजना का उद्देश्य वही रहा।
जयराम ठाकुर ने कहा कि वर्ष 2014 में जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने तो विपक्ष ने यह प्रचार किया कि मनरेगा को बंद कर दिया जाएगा, जबकि सच्चाई इसके उलट है। उन्होंने बताया कि यूपीए सरकार के दौरान मनरेगा पर कुल 2 लाख 13 हजार करोड़ रुपये खर्च हुए, जबकि मोदी सरकार ने पिछले दस वर्षों में इस योजना पर 8 लाख 53 हजार करोड़ रुपये खर्च किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस जानबूझकर भ्रम फैला रही है कि नाम बदलने से योजना को कमजोर किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए मनरेगा में केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी 90:10 ही रहेगी, जबकि अन्य राज्यों में यह अनुपात 60:40 होगा। साथ ही मनरेगा के तहत कार्यदिवस 100 से बढ़ाकर 125 कर दिए गए हैं। अब पंचायत स्तर पर इस राशि का उपयोग महिला मंडल, युवक मंडल भवनों और अन्य सामुदायिक ढांचों के निर्माण में भी किया जा सकेगा, जिससे केवल रास्तों और गड्ढों तक सीमित रहने के बजाय ढांचागत विकास को बढ़ावा मिलेगा।
जयराम ठाकुर ने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए इन बदलावों को लागू किया गया है, लेकिन विपक्ष बेवजह राजनीतिक बयानबाजी कर रहा है। इस मौके पर पूर्व मंत्री एवं सदर विधायक अनिल शर्मा, विधायक राकेश जम्वाल, इंद्र सिंह गांधी, अजय राणा और निहाल चंद सहित अन्य नेता भी मौजूद रहे।
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