हिमाचल प्रदेश के मंडी ज़िले की ग्राम पंचायत टांडू के महेड़ चौहट्टा गांव से एक भावनात्मक और प्रेरणादायक घटना सामने आई है, जहां इंसानियत और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता की एक मिसाल कायम की गई। गांव के निवासी विप्लव सकलानी ने शुक्रवार की रात एक डरे-सहमे और लाचार नन्हे खरगोश के बच्चे की जान बचाकर यह साबित कर दिया कि एक जागरूक नागरिक समाज में कितना बड़ा बदलाव ला सकता है।

यह घटना उस समय की है जब विप्लव सकलानी रात को अपने घर लौट रहे थे। रास्ते में उन्होंने देखा कि घर से कुछ दूरी पर एक नन्हा खरगोश सहमा हुआ बैठा है। उसकी हालत देखकर यह अंदाज़ा लगाना कठिन नहीं था कि वह किसी संकट में है। उस समय आस-पास जंगली जानवरों का खतरा भी बना हुआ था, जिससे यह स्पष्ट था कि अगर समय पर कोई सहायता न मिली, तो उस मासूम जीव की जान जा सकती थी।
विप्लव ने बिना देर किए उस नन्हे खरगोश को उठाया और अपने घर ले आए ताकि वह सुरक्षित रह सके। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि यह सिर्फ अस्थायी मदद नहीं हो, बल्कि उस जानवर को सही स्थान तक पहुंचाया जाए। इसके लिए उन्होंने तुरंत मंडी वन मंडल के वन मंडल अधिकारी (DFO) वासु डोगर से संपर्क किया और पूरी स्थिति की जानकारी दी। उस समय डीएफओ वासु डोगर अवकाश पर थे, लेकिन उन्होंने मामले की गंभीरता को समझते हुए रेंज ऑफिसर से संपर्क किया और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
उनके निर्देशानुसार, विप्लव सकलानी और उनकी पत्नी संजना सकलानी ने शनिवार सुबह वन विभाग के भ्यूली स्थित कार्यालय में पहुंचकर खरगोश के बच्चे को फॉरेस्ट गार्ड हेमराज के सुपुर्द कर दिया। वन विभाग के अधिकारियों ने विप्लव और संजना के इस सराहनीय कदम की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समाज में वन्य जीवों और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाते हैं।
यह घटना इस बात का प्रमाण है कि जब आम नागरिक संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का परिचय देते हैं, तो वह न केवल एक जीवन को बचाते हैं, बल्कि समाज में जागरूकता और सकारात्मक सोच को भी बढ़ावा देते हैं। विप्लव सकलानी की यह पहल एक मिसाल है, जो बताती है कि हर व्यक्ति के छोटे से कदम से भी बड़ा परिवर्तन संभव है।
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