Himachal: HRTC बनाम निजी बसें: रूट टाइमिंग विवाद ने पकड़ा तूल, FIR नहीं हटी तो प्रदेशभर में बसें खड़ी करने की चेतावनी

सिरमौर जिले के नाहन में एचआरटीसी और निजी बस ऑपरेटरों के बीच रूट टाइमिंग को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पूरे प्रदेश में गूंजने लगा है। इस मुद्दे पर एचआरटीसी चालक यूनियन ने सरकार और निगम प्रबंधन के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। यूनियन का आरोप है कि प्रदेशभर में तैनात आरटीओ जानबूझकर ऐसी नीतियां अपना रहे हैं, जिनसे एचआरटीसी को कमजोर किया जा सके और धीरे-धीरे खत्म करने की साजिश रची जा रही है।

शनिवार को शिमला में आयोजित प्रेस वार्ता में एचआरटीसी चालक यूनियन के अध्यक्ष मान सिंह ठाकुर ने कहा कि नाहन में हाल ही में एक निजी बस को एचआरटीसी बस से ठीक पांच मिनट पहले रूट पर चलने की अनुमति दी गई। यह रूट पिछले करीब 40 वर्षों से एचआरटीसी द्वारा संचालित किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि निजी बस को पहले का समय देकर एचआरटीसी बस को जानबूझकर फेल करने की कोशिश की गई, जिससे दोनों चालकों के बीच विवाद पैदा हुआ।

मान सिंह ठाकुर ने कहा कि यही स्थिति पूरे हिमाचल प्रदेश में देखने को मिल रही है। आरटीओ निजी बसों को एचआरटीसी बसों से पहले की टाइमिंग दे रहे हैं, जिसके कारण एचआरटीसी की बसें खाली चल रही हैं और निगम को भारी घाटा उठाना पड़ रहा है। इसके बावजूद घाटे की जिम्मेदारी चालकों और परिचालकों पर डाल दी जाती है, जबकि असल दोषी आरटीओ की नीतियां हैं। यूनियन ने सरकार से मांग की है कि चालकों को दोषी ठहराना तुरंत बंद किया जाए।

एफआईआर रद्द नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी देते हुए यूनियन अध्यक्ष ने कहा कि यदि नाहन में एचआरटीसी चालक पर दर्ज एफआईआर को जल्द वापस नहीं लिया गया, तो प्रदेशभर में एचआरटीसी बसों का संचालन ठप कर दिया जाएगा और सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।

इसके साथ ही यूनियन ने निगम की होटल चयन प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप लगाया गया है कि दिल्ली, चंडीगढ़ और अमृतसर जैसे लंबे रूटों पर चलने वाली एचआरटीसी बसों को सोलन से पहले ही प्रबंधन द्वारा चिन्हित कुछ खास होटलों पर एक-एक घंटे तक रोका जाता है। इससे सोलन और आसपास के क्षेत्रों की सवारियां बसों में नहीं चढ़ पातीं और निगम को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

यूनियन ने बर्फबारी वाले क्षेत्रों में तैनात चालकों और परिचालकों को मिलने वाली स्नो किट के वितरण में भी भ्रष्टाचार और बंदरबांट के आरोप लगाए हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। यूनियन का कहना है कि यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो न केवल एचआरटीसी को भारी नुकसान होगा, बल्कि प्रदेश की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित होगी।

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