हिमाचल प्रदेश सरकार ने घरेलू और वाणिज्यिक उपयोग के लिए विकसित किए जाने वाले प्लॉट्स की रजिस्ट्रेशन फीस में बड़ा बदलाव करते हुए नई दरें लागू कर दी हैं। यह फैसला रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी यानी रेरा के तहत लिया गया है, ताकि प्रदेश में प्लॉटेड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स को अधिक पारदर्शी और नियंत्रित बनाया जा सके। आवास विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के साथ ही ये नई दरें पूरे प्रदेश में प्रभावी हो गई हैं।
नई व्यवस्था के तहत अब प्लॉट्स की रजिस्ट्रेशन फीस परियोजना के प्रकार और क्षेत्र के आधार पर तय की गई है। आवासीय उपयोग के लिए विकसित प्लॉट्स पर पहले जहां 10 रुपये प्रति वर्ग मीटर शुल्क लिया जाता था, अब इसे बढ़ाकर ग्रामीण क्षेत्रों में 30 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 40 रुपये प्रति वर्ग मीटर कर दिया गया है।
वहीं वाणिज्यिक उपयोग के लिए विकसित प्लॉट्स की फीस में भी बड़ा इजाफा किया गया है। पहले 20 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर अब ग्रामीण क्षेत्रों में 60 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 80 रुपये प्रति वर्ग मीटर तय की गई है। इसके अलावा जिन परियोजनाओं में आवासीय और वाणिज्यिक दोनों तरह के प्लॉट्स शामिल होंगे, उनके लिए अलग शुल्क निर्धारित किया गया है। ऐसी संयुक्त परियोजनाओं पर ग्रामीण क्षेत्रों में 45 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 60 रुपये प्रति वर्ग मीटर रजिस्ट्रेशन फीस देनी होगी।
अधिसूचना के अनुसार स्वीकृत योजनाओं के तहत भी संशोधित दरें लागू होंगी। आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत योजना में पहले 10 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर अब ग्रामीण क्षेत्र में 30 रुपये और शहरी क्षेत्र में 40 रुपये प्रति वर्ग मीटर होगी। वाणिज्यिक उपयोग के लिए पहले 20 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर को बढ़ाकर ग्रामीण क्षेत्रों में 60 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 80 रुपये प्रति वर्ग मीटर कर दिया गया है। वहीं संयुक्त आवासीय एवं वाणिज्यिक उपयोग की स्वीकृत योजना के तहत निर्मित क्षेत्र पर पहले 15 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर अब ग्रामीण क्षेत्र में 45 रुपये और शहरी क्षेत्र में 60 रुपये प्रति वर्ग मीटर निर्धारित की गई है।
सरकार का मानना है कि नई दरों से प्लॉटेड विकास परियोजनाओं का पंजीकरण रेरा के तहत और अधिक सख्त होगा। इससे अवैध कॉलोनियों पर रोक लगेगी और प्लॉट खरीदने वाले लोगों को बेहतर कानूनी सुरक्षा मिल सकेगी। हिमाचल प्रदेश सरकार ने रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 84 के तहत नियमों में संशोधन किया है, जिसे हिमाचल प्रदेश भू-संपदा (विनियमन और विकास) संशोधन नियम, 2025 नाम दिया गया है। इसके तहत अब किसी भी परियोजना के पंजीकरण के समय प्रमोटर को संशोधित रजिस्ट्रेशन फीस ऑनलाइन या निर्धारित माध्यम से जमा करनी होगी।
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