शिमला। उद्योग एवं संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जानबूझकर हिमाचल प्रदेश सरकार का गला घोंटने का प्रयास कर रही है। प्रदेश सचिवालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि प्राकृतिक आपदा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 सितंबर 2025 को हिमाचल दौरे के दौरान 1,500 करोड़ रुपये के विशेष राहत पैकेज की घोषणा की थी, लेकिन अब तक इस राशि में से एक भी रुपया राज्य को नहीं मिला है।
हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि राज्य सरकार सीमित वित्तीय संसाधनों के बावजूद राजस्व जुटाने का हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में आई भीषण प्राकृतिक आपदा से हिमाचल प्रदेश को 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ था। केंद्र सरकार की टीम ने भी करीब 9 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के नुकसान का आकलन किया था, जिसके बाद केंद्र ने 2006 करोड़ रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की। हालांकि यह राशि भी काफी देरी से मिल रही है। उन्होंने कहा कि दिसंबर 2025 में वर्ष 2023 की आपदा के लिए केवल 602 करोड़ रुपये जारी किए गए, जबकि आपदा राहत समय पर मिलनी चाहिए।
मंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने हिमाचल को मिलने वाली आर्थिक मदद में भारी कटौती की है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021-22 में जहां राज्य को 10,257 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा अनुदान मिलता था, वहीं वर्ष 2025-26 में इसे घटाकर मात्र 3,257 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा जून 2022 से जीएसटी मुआवजा भी बंद कर दिया गया, जिससे प्रदेश को हर साल करीब 2,600 से 2,700 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान हुआ।
हर्षवर्धन चौहान ने यह भी कहा कि प्रदेश के कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना देने के कारण केंद्र सरकार ने 1,770 करोड़ रुपये की अतिरिक्त उधारी की सुविधा बंद कर दी। वहीं कोरोना काल में दी गई 2 फीसदी अतिरिक्त उधारी को वर्ष 2023 और 2025 की आपदाओं के बाद बहाल करने की मांग की गई थी, लेकिन केंद्र सरकार ने इस पर भी कोई सहमति नहीं दी।
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