Himachal: मुख्यमंत्री निदान योजना ठप! 2 महीने से वेतन नहीं, IGMC से जिला अस्पतालों तक लैब सेवाएं प्रभावित

हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की अहम कड़ी मानी जाने वाली मुख्यमंत्री निदान योजना इस समय गंभीर संकट से गुजर रही है। प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल IGMC शिमला से लेकर जिला मुख्यालयों के सरकारी अस्पतालों तक लैब टेस्ट की मशीनें बंद पड़ी हैं। इसका कारण सरकारी खजाने की कमी नहीं, बल्कि उन कर्मचारियों का काम बंद करना है जो इन मशीनों को संचालित करते हैं। कृष्णा लैब के कर्मचारियों ने पिछले दो महीनों से वेतन न मिलने के विरोध में काम रोक दिया है, जिससे मरीजों की जांच सेवाएं प्रभावित हो गई हैं और अस्पतालों में आने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

राज्य सरकार जनता को सस्ती और सुलभ जांच सुविधा देने का दावा करती है, लेकिन इन सेवाओं को जमीन पर लागू करने वाले आउटसोर्स कर्मचारी खुद आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। ऊना के क्षेत्रीय अस्पताल सहित प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों में कार्यरत कर्मचारियों को दिसंबर और जनवरी महीने का वेतन अब तक नहीं मिला है। दूर-दराज के इलाकों से आकर शहरों में सेवाएं देने वाले इन कर्मचारियों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कई कर्मचारियों के पास कमरे का किराया देने तक के पैसे नहीं बचे हैं और घर चलाने के लिए राशन जुटाना भी मुश्किल हो गया है।

कर्मचारियों का कहना है कि कंपनी प्रबंधन ने सोमवार तक वेतन देने का आश्वासन दिया था, लेकिन मंगलवार तक भी उनके खातों में पैसे नहीं पहुंचे। इससे नाराज कर्मचारियों ने मंगलवार सुबह 9 बजे से 12 बजे तक काम का बहिष्कार किया। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो उनका आंदोलन पूरे प्रदेश में और तेज हो सकता है, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक प्रभावित होंगी।

इस विवाद की जड़ में सरकार और निजी कंपनी के बीच वित्तीय भुगतान में देरी बताई जा रही है। मुख्यमंत्री निदान योजना को पीपीपी मॉडल के तहत निजी कंपनी को सौंपा गया है, जिसके तहत कंपनी सस्ती दरों पर टेस्ट करती है और सरकार उसे भुगतान करती है। सूत्रों के अनुसार, सरकार पर कंपनी की करोड़ों रुपये की देनदारी लंबित है, जिसके कारण कंपनी ने कर्मचारियों का वेतन रोक दिया है। यह स्थिति सरकारी प्रबंधन और निजी भागीदारी के बीच समन्वय की कमी को उजागर करती है।

इस पूरे मामले पर ऊना के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजीव कुमार वर्मा ने कहा कि विभाग को हड़ताल की कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। उन्होंने बताया कि मरीजों को परेशानी से बचाने के लिए अस्पताल की सरकारी लैब में जांच सेवाओं को सक्रिय रखा गया है, ताकि इमरजेंसी में आने वाले मरीजों की जांच प्रभावित न हो और जरूरी सेवाएं जारी रहें।

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