धर्मशाला, 7 जनवरी। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के तहत उपायुक्त कार्यालय स्थित एनआईसी सभागार में जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए अतिरिक्त उपायुक्त विनय कुमार ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों और गंभीर चोटों की संख्या को कम करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके लिए सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ काम करना होगा।
बैठक के दौरान सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े आंकड़ों की समीक्षा की गई और जिले में चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स, जन-जागरूकता अभियानों, राहत एवं बचाव व्यवस्था तथा राह-वीर योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा हुई। अतिरिक्त उपायुक्त ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं के पीछे सबसे बड़ा कारण मानवीय भूल है। इसके अलावा ओवरस्पीडिंग, नशे की हालत में वाहन चलाना, खतरनाक ओवरटेकिंग और यातायात नियमों की अनदेखी भी प्रमुख वजहें हैं। उन्होंने बताया कि करीब 93 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाएं इन्हीं कारणों से हो रही हैं, जबकि 45 से 50 प्रतिशत हादसे राष्ट्रीय राजमार्गों पर सामने आते हैं।

उन्होंने जानकारी दी कि जिले में अब तक 118 ब्लैक स्पॉट्स चिन्हित किए जा चुके हैं। इन स्थानों की पहचान, नियमित निगरानी और सुधार के लिए उपमंडल स्तर पर समितियों का गठन किया गया है, जिनमें पुलिस और लोक निर्माण विभाग की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। अतिरिक्त उपायुक्त ने निर्देश दिए कि सभी चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स पर जल्द और प्रभावी सुधारात्मक कार्य किए जाएं, ताकि दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
अतिरिक्त उपायुक्त ने राह-वीर योजना के बारे में बताते हुए कहा कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को समय पर अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचाने वाले नागरिकों को सम्मानित किया जाता है। उन्होंने बताया कि ऐसे राह-वीरों को 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर भी सम्मानित किया जाएगा। इस योजना के तहत मदद करने वाले व्यक्ति को 25 हजार रुपये तक का नकद पुरस्कार दिया जाता है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर चयनित राह-वीर को एक लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि मिलती है।
उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा के लिए जन-जागरूकता बेहद जरूरी है। इसके लिए एनजीओ के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे और स्कूलों, कॉलेजों व सार्वजनिक स्थानों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही ड्राइवरों की नियमित आई-टेस्टिंग पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि चालक की अस्वस्थता भी दुर्घटनाओं का कारण बन सकती है, इसलिए खासतौर पर स्कूल बस चालकों की नेत्र जांच नियमित रूप से सुनिश्चित की जाए। उन्होंने बताया कि जिले में कुल 1784 स्कूल बसें संचालित हो रही हैं, जिनमें प्रतिदिन बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे सफर करते हैं।
अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि यातायात नियमों का पालन सख्ती से करवाया जाएगा। अस्पतालों और स्कूलों के आसपास सुरक्षित पैदल क्रॉसिंग विकसित की जाएंगी, ताकि बच्चों, मरीजों और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि दुर्घटना के बाद त्वरित चिकित्सा सहायता बेहद जरूरी है। इसके लिए इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम को और मजबूत करने के निर्देश सभी संबंधित विभागों को दिए गए हैं। प्रशासन का लक्ष्य सड़क दुर्घटनाओं में शून्य मृत्यु दर हासिल करना है, जिसके लिए आम जनता की सहभागिता भी अनिवार्य है।
इस अवसर पर क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी मनीष सोनी ने सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी और संबंधित आंकड़े प्रस्तुत किए। बैठक में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजिंदर जरियाल, एसडीएम मोहित रत्न, संयुक्त आयुक्त शहरी विकास सुरेंद्र कटोच, उपनिदेशक शिक्षा अजय संब्याल, डॉ. महिमा कौल, आरएम एचआरटीसी साहिल कपूर, सक्षम सोसायटी के अध्यक्ष सुनील कौल, जिला पंचायत अधिकारी विक्रम ठाकुर सहित कई विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिले के सभी एसडीएम, एनएचएआई और अन्य विभागों के अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।
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