Himachal: मनरेगा पर सियासी संग्राम, नाम से गांधी हटाने के विरोध में रिज मैदान पर सीएम सुक्खू समेत कांग्रेस नेताओं का उपवास

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के प्रारूप में बदलाव और इसके नाम से ‘महात्मा गांधी’ का नाम हटाए जाने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ कांग्रेस ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है। इस फैसले के विरोध में शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री समेत कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान पर महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने दो घंटे का सामूहिक उपवास किया।

इस विरोध प्रदर्शन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार, प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल, दोनों सह-प्रभारी और कई कैबिनेट मंत्री भी शामिल रहे। कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी ने इस उपवास को राजनीतिक रूप से अहम बना दिया। उपवास के दौरान नेताओं ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधते हुए कहा कि मौजूदा नीतियों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था कमजोर हो रही है और गरीब वर्ग के हितों की अनदेखी की जा रही है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की आजीविका की गारंटी है। उन्होंने आरोप लगाया कि योजना के नाम से महात्मा गांधी का नाम हटाना इसकी मूल भावना और आत्मा पर सीधा हमला है। उन्होंने यह भी कहा कि यह फैसला प्रधानमंत्री कार्यालय के दबाव में लिया गया और केंद्रीय कैबिनेट को विश्वास में नहीं लिया गया।

विनय कुमार ने चेतावनी दी कि मनरेगा के स्वरूप में बदलाव से ग्रामीणों को मिलने वाले 100 दिन के सुनिश्चित रोजगार पर खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर पीछे हटने वाली नहीं है।

कांग्रेस ने साफ किया कि यह आंदोलन केवल हिमाचल प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि पिछले दो सप्ताह से पूरे देश में मनरेगा के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने मनरेगा के मूल स्वरूप और नाम को तुरंत बहाल नहीं किया, तो यह आंदोलन और तेज किया जाएगा।

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