श्रावण मास के पावन अवसर पर हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध बैजनाथ शिव मंदिर में इस वर्ष श्रद्धालु शिवलिंग पर जलाभिषेक कर सकेंगे। हालांकि, प्रशासन ने साफ किया है कि किसी भी श्रद्धालु को मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। श्रद्धालुओं की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर में एक अस्थायी जलहरी की व्यवस्था की गई है, जिसे पीतल की पाइप के माध्यम से गर्भगृह स्थित शिवलिंग से जोड़ा गया है। इस जलहरी में जैसे ही श्रद्धालु जल अर्पित करेंगे, वह सीधे शिवलिंग पर चढ़ सकेगा।
बैजनाथ प्रशासन ने यह निर्णय हाल ही में विधायक किशोरी लाल की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद लिया। इस बैठक में श्रावण मास के दौरान मंदिर में संभावित भीड़ को देखते हुए व्यापक व्यवस्था की रूपरेखा तय की गई। एसडीएम संकल्प गौतम और तहसीलदार रमन ठाकुर ने बताया कि बुजुर्गों और दिव्यांगजनों को दर्शन में प्राथमिकता दी जाएगी और सभी श्रद्धालुओं से प्रशासनिक व्यवस्था में सहयोग करने की अपील की गई है।
संभावित वर्षा को देखते हुए मंदिर प्रांगण में विशेष इंतजाम किए गए हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जर्मन हैंगर लगाए गए हैं और ज़मीन पर मैट बिछाई गई है, ताकि बारिश या फिसलन की स्थिति में किसी को कोई असुविधा न हो। साथ ही, भीड़ को नियंत्रित रखने के लिए पुलिस बल, स्वयंसेवी संगठन और एनसीसी कैडेट्स की मदद ली जाएगी।
श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण के लिए अलग काउंटर स्थापित किए गए हैं और भोजन की व्यवस्था के लिए पास के प्राथमिक विद्यालय में लंगर की व्यवस्था की गई है। हालांकि, मंदिर में पूर्ववत चलने वाला रोजाना का लंगर भी जारी रहेगा।
खीरगंगा घाट पर पुरुषों और महिलाओं के लिए स्नानागार की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। वहीं, नगर पंचायत के कार्यकारी अधिकारी चमन कपूर ने मेला स्थल पर दुकानदारों और स्थानीय नागरिकों से साफ-सफाई बनाए रखने की अपील की है। नगर पंचायत की ओर से पर्याप्त संख्या में सफाई कर्मचारियों की तैनाती भी की गई है।
प्रशासन ने स्थानीय लोगों से आग्रह किया है कि वे नियमों का पालन करें और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को प्राथमिकता दें, ताकि सभी को सुचारू रूप से दर्शन और पूजा का लाभ मिल सके।
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