Himachal: BPL सूची में पारदर्शिता के लिए सरकार का बड़ा फैसला, अब वीडियोग्राफी होगी अनिवार्य

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बीपीएल परिवारों के चयन में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इस बार सरकार ने कई अहम बदलाव किए हैं। जहां आवेदनकर्त्ता को शपथ पत्र देकर इसके लिए दावेदारी जतानी होगी, वहीं गलत शपथ पत्र देने पर मुकद्दमा दर्ज हो सकता है। इसी कड़ी में अब बीपीएल परिवारों की सूची तैयार करने के लिए बाकायदा वीडियोग्राफी की जाएगी, वहीं अलग होने वाले परिवारों को बीपीएल सूची में 3 वर्षों तक कंसीडर नहीं किया जाएगा। इन दिनों पात्र परिवारों द्वारा बीपीएल सूची में शामिल होने के लिए आवेदन प्रक्रिया चली हुई है, जो 30 अप्रैल तक जारी रहेगी।

ऐसे में बीपीएल परिवारों के चयन के लिए होने वाली ग्रामसभा की पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी होगी और इसकी व्यवस्था संबंधित पंचायत सचिव की तरफ से पंचायत समिति में उपलब्ध धन के तहत करनी होगी, जिसका रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाएगा। वहीं बीडीओ को ग्रामसभा की बैठक आयोजित होने से पहले इस व्यवस्था को लागू करना होगा। इसी तरह से ग्रामसभा में कानून व्यवस्था भंग होने की आशंका को देखते हुए संबंधित एसडीएम सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की सहायता भी प्रदान करेंगे।

राज्य सरकार ने बीपीएल सूची में होने वाले फर्जीवाड़े को रोकने के लिए इस बार एक और बड़ा निर्णय लिया है। पहले से बीपीएल सूची में शामिल कोई भी सदस्य अलग परिवार के लिए संबंधित पंचायत में आवेदन करता है तो ऐसी स्थिति में अलग हुए नए परिवार को 3 वर्ष तक बीपीएल सूची में शामिल करने के लिए कंसीडर नहीं किया जाएगा। हालांकि विधवा, परित्यक्त, एकल नारी और तलाकशुदा महिलाओं पर यह नियम लागू नहीं होगा। राज्य में बीपीएल परिवारों को सरकार कई तरह की सुविधाएं दे रही है, ताकि ऐसे परिवारों को जीवन यापन करने में मुश्किलों का सामना न करना पड़े।

प्रदेश में गरीब परिवारों को सरकार डिपुओं के माध्यम से सस्ते राशन, अस्पतालों में नि:शुल्क इलाज, नौकरी में प्राथमिकता, बिजली का फ्री मीटर लगाने व मकान निर्माण के लिए वित्तीय सहायता सहित कई तरह सुविधाएं दे रही है। ऐसे में बीपीएल सूची में शामिल होने के लिए प्रभावशाली परिवार कई तरह के हथकंडे अपनाते हैं। इस तरह के परिवार बीपीएल परिवारों के चयन के लिए आयोजित होने वाली ग्रामसभा की बैठकों से पहले अलग परिवार के लिए आवेदन करते हैं, उसके बाद ऐसे नए परिवार बीपीएल में शामिल होने के लिए ग्रामसभा की बैठकों में अपनी दावेदारी जताते हैं, लेकिन अब इस तरह की होशियारी से काम नहीं चलने वाला है।

राज्य में अब प्रधानों की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली ग्रामसभा की बैठकों में बीपीएल परिवारों का सीधा चयन नहीं होगा। इन बैठकों ने लिए एसडीएम की ओर से 3 सदस्यीय वैरीफिकेशन कमेटी का गठन कर दिया गया है, जिसमें पंचायत सचिव, पटवारी और आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ता को शामिल किया गया है। ऐसे में अब यह कमेटी आवेदनों की जांच और साथ लगे डॉक्यूमैंट्स की वैरीफिकेशन करेगी। वैरीफिकेशन कमेटी की ओर से तैयार की गईं सूचियों को 15 जून तक सार्वजनिक जांच के लिए ग्राम पंचायत के नोटिस बोर्ड पर प्रकाशित किया जाएगा, उसके बाद जुलाई माह में होने वाली ग्रामसभा की बैठक में चर्चा के लिए रखा जाएगा।

नए परिवारों को बीपीएल सूची में शामिल करने वाली वैरीफिकेशन कमेटी की सिफारिशों पर अंतिम मोहर ग्राम सभा में लगेगी। इसी तरह से वर्तमान में बीपीएल परिवारों की सूची जो समावेशन मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं, ऐसे परिवारों को भी बीपीएल सूची से हटाने की सिफारिश को भी वैरीफिकेशन कमेटी ग्रामसभा में निर्णय के लिए रखेगी।

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