लद्दाख के प्रसिद्ध इंजीनियर और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को बड़ी राहत मिली है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत उनकी नजरबंदी को रद्द कर दिया है। मंत्रालय ने सख्त कानून की धारा 14 के तहत यह कदम उठाते हुए लेह के जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी उस आदेश को वापस ले लिया, जिसके तहत वांगचुक को 26 सितंबर 2025 से हिरासत में रखा गया था। गृह मंत्रालय ने कहा कि वांगचुक पहले ही एनएसए के तहत तय नजरबंदी अवधि का लगभग आधा समय पूरा कर चुके हैं। बताया जा रहा है कि किसी भी बंदी के मामले में इस प्रावधान का उपयोग पहले शायद ही कभी किया गया हो।
राष्ट्रीय सुरक्षा कानून 1980 के तहत किसी व्यक्ति को बिना अदालत में मुकदमे के अधिकतम एक साल तक हिरासत में रखा जा सकता है, यदि प्रशासन को लगता है कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है। वांगचुक की रिहाई ऐसे समय हुई है जब अगले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट में उनकी पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई होनी है। इस याचिका में एनएसए के तहत जारी हिरासत आदेश को चुनौती दी गई है।
इस बीच लेह और कारगिल में नागरिक समाज संगठनों ने 16 मार्च को संविधानिक सुरक्षा की मांग को लेकर प्रदर्शन का आह्वान किया है। लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस ने इस प्रदर्शन को जारी रखने का फैसला किया है। 9 मार्च को दिए एक इंटरव्यू में गीतांजलि अंगमो ने कहा था कि रिहाई के बाद वांगचुक आंदोलन के आक्रामक रास्ते पर नहीं जाएंगे, लेकिन लद्दाख को संविधानिक सुरक्षा दिलाने के लिए बातचीत और संवाद के जरिए इस आंदोलन का हिस्सा बने रहेंगे।
हालांकि 12 मार्च को अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए वांगचुक ने साफ किया कि उन्होंने सक्रियता से दूरी नहीं बनाई है। उन्होंने कहा कि आगे की राह के लिए स्पष्टता, एकता और ईमानदार संवाद की जरूरत है। वांगचुक पहले एक जलवायु कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते थे, लेकिन बाद में उन्होंने लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और संविधानिक सुरक्षा की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया। उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो लद्दाख में हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव लर्निंग की सह-संस्थापक हैं।
लद्दाख के नए नियुक्त उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने इस फैसले का स्वागत किया, लेकिन साथ ही कहा कि लद्दाख में आंदोलन और हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि लोगों की आकांक्षाओं और चिंताओं से जुड़े सभी मुद्दों का समाधान संवाद के जरिए किया जाएगा।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी अपने बयान में कहा कि सरकार लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास का माहौल बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से वांगचुक के खिलाफ एनएसए के तहत जारी आदेश को रद्द किया गया है। मंत्रालय ने बताया कि 24 सितंबर 2025 को लेह में उत्पन्न गंभीर कानून-व्यवस्था की स्थिति के बाद वांगचुक को हिरासत में लिया गया था। उस समय वांगचुक और 15 अन्य लोग 35 दिन की भूख हड़ताल के 15वें दिन पर थे, जब लेह शहर में हिंसा भड़क गई। पुलिस फायरिंग में कम से कम चार लोगों की मौत हुई थी, जिनमें कारगिल युद्ध का एक पूर्व सैनिक भी शामिल था, जबकि 160 लोग घायल हुए थे।
पिछले पांच वर्षों में यह वांगचुक की पांचवीं भूख हड़ताल थी, जिसके जरिए उन्होंने सरकार का ध्यान लद्दाख के लिए संविधानिक सुरक्षा की मांग की ओर खींचने की कोशिश की थी। गृह मंत्रालय ने कहा कि सरकार क्षेत्र के विभिन्न समुदायों और नेताओं के साथ लगातार बातचीत कर रही है, लेकिन बंद और प्रदर्शनों का माहौल लद्दाख की शांतिप्रिय छवि को नुकसान पहुंचा रहा है और इससे छात्रों, नौकरी के इच्छुक युवाओं, व्यापारियों, टूर ऑपरेटरों और पर्यटन उद्योग पर भी असर पड़ रहा है।
सरकार ने दोहराया कि वह लद्दाख के लिए आवश्यक सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है और उम्मीद जताई कि हाई-पावर्ड कमेटी सहित अन्य मंचों के जरिए संवाद और रचनात्मक चर्चा के माध्यम से क्षेत्र के मुद्दों का समाधान निकाला जाएगा।
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