Himachal: स्क्रीनिंग टेस्ट लागू हुआ तो होगा प्रदेशव्यापी विरोध! हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ की सरकार को दो टूक चेतावनी

हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ ने शुक्रवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता में सीबीएसई स्कूलों में प्रस्तावित नई व्यवस्था को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने साफ शब्दों में कहा कि यदि शिक्षकों की योग्यता परखने के नाम पर किसी भी प्रकार का स्क्रीनिंग टेस्ट लागू किया गया तो उसका पूरे प्रदेश में जोरदार विरोध किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर शिक्षक संगठन न्यायालय का दरवाजा खटखटाने से भी पीछे नहीं हटेगा। प्रेस वार्ता में महासचिव तिलक नायक और जिला शिमला प्रधान तारा चंद शर्मा सहित अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे।

संघ ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, मुख्य सचिव, शिक्षा सचिव और निदेशक शिक्षा को लिखित सुझाव सौंपते हुए मांग की है कि शिक्षकों की कार्यकुशलता का आकलन बोर्ड परीक्षा परिणाम के आधार पर किया जाए, न कि किसी अतिरिक्त परीक्षा के जरिए। संघ का कहना है कि प्रदेश के सभी शिक्षक निर्धारित प्रशिक्षण और आयोग की चयन प्रक्रिया से होकर आए हैं, ऐसे में स्क्रीनिंग टेस्ट लागू करना उनके आत्मसम्मान और पेशेवर दक्षता पर सवाल खड़ा करने जैसा है।

संघ ने अपने 8 प्रमुख सुझावों में योग्य और अनुभवी शिक्षकों से अतिरिक्त परीक्षा न लेने, वर्तमान सीबीएसई विद्यालयों को एक वर्ष का अवसर देने, रिक्त पदों को शत-प्रतिशत भरने, स्थानांतरण प्रक्रिया जारी रखने, पदोन्नति प्रभावित न करने, उप-प्राचार्य पद सृजित करने, फीस वृद्धि न करने और निजीकरण का विरोध शामिल किया है। वीरेंद्र चौहान ने उम्मीद जताई कि सरकार शिक्षक संगठनों से संवाद कर सकारात्मक निर्णय लेगी, अन्यथा संगठन विरोध का रास्ता अपनाएगा।

संघ ने प्रदेश भर के शिक्षकों से अपील की है कि वे किसी भी स्क्रीनिंग टेस्ट के लिए आवेदन न करें। अध्यक्ष का कहना है कि यदि शिक्षक इस परीक्षा के लिए आवेदन नहीं करेंगे तो यह प्रस्ताव स्वतः ही समाप्त हो जाएगा।

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