पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने पंजाब सरकार द्वारा पंजाब केसरी ग्रुप पर की गई छापेमारी को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सत्ता के अहंकार में लिए गए फैसले हमेशा विनाश की ओर ले जाते हैं। अनुराग ठाकुर ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार यह मानकर चल रही है कि छापेमारी और दबाव बनाकर आवाजों को खामोश किया जा सकता है, लेकिन सच्चाई न तो रेड से रुकती है और न ही धमकियों से दबाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि सत्ता का अहंकार ज्यादा दिन तक नहीं टिकता और उसका अंत तय होता है। अपने बयान के अंत में उन्होंने सरकार को चेताते हुए कहा कि उसे ईश्वर से डरना चाहिए।
इससे पहले पंजाब केसरी समूह ने पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को पत्र लिखकर पंजाब सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्र में कहा गया है कि सरकार अलग-अलग विभागों के जरिए पंजाब केसरी समूह और उससे जुड़े संस्थानों को निशाना बना रही है, जिससे मीडिया को डराने और दबाने की कोशिश की जा रही है।
पंजाब केसरी समूह के अनुसार, 31 अक्टूबर 2025 को प्रकाशित एक खबर के बाद हालात बिगड़ने शुरू हुए। यह खबर सत्तारूढ़ पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक से जुड़े विपक्ष के आरोपों पर आधारित थी और पूरी तरह संतुलित थी। इसके बाद 2 नवंबर 2025 से पंजाब सरकार ने पंजाब केसरी समूह को मिलने वाले सभी सरकारी विज्ञापन बंद कर दिए।
समूह ने बताया कि आर्थिक दबाव के बावजूद अखबार ने स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता जारी रखी। हालांकि, बीते कुछ दिनों में पंजाब केसरी समूह और उसके प्रमोटरों के खिलाफ लगातार कार्रवाइयां की गईं। पत्र के अनुसार, 11 से 15 जनवरी 2026 के बीच विभिन्न सरकारी विभागों ने कई छापेमारी की। इनमें जालंधर स्थित चोपड़ा होटल्स प्राइवेट लिमिटेड के होटल पर एफएसएसएआई, जीएसटी और आबकारी विभाग की कार्रवाई शामिल है।
इसके अलावा पंजाब केसरी की प्रिंटिंग प्रेस पर जालंधर और लुधियाना में फैक्ट्री विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा छापे मारे गए। समूह ने आरोप लगाया कि आबकारी विभाग ने शो-कॉज नोटिस जारी कर लाइसेंस रद्द कर दिया और जालंधर स्थित होटल की बिजली आपूर्ति भी काट दी गई। 15 जनवरी 2026 को लुधियाना और जालंधर की प्रिंटिंग प्रेस पर दोबारा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई हुई।
पत्र में यह भी बताया गया कि जालंधर, लुधियाना और बठिंडा स्थित प्रिंटिंग प्रेस के बाहर भारी पुलिस बल तैनात है, जिससे अखबारों के संचालन पर खतरा मंडरा रहा है और प्रिंटिंग कार्य बाधित या पूरी तरह बंद हो सकता है।
पंजाब केसरी समूह ने अपने इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि इसके संस्थापक स्वर्गीय लाला जगत नारायण ने 1949 में हिंद समाचार की शुरुआत की थी और 1965 में पंजाब केसरी की नींव रखी गई। आतंकवाद के दौर में निर्भीक पत्रकारिता के कारण समूह के कई लोगों ने अपनी जान गंवाई, जिनमें स्वर्गीय लाला जगत नारायण और स्वर्गीय रोमेश चंद्र चोपड़ा शामिल हैं। इसके बावजूद अखबार ने कभी सच लिखना नहीं छोड़ा।
समूह का कहना है कि अलग-अलग विभागों द्वारा एक साथ की जा रही ये कार्रवाइयां साफ तौर पर मीडिया को डराने की मंशा दिखाती हैं। उन्होंने राज्यपाल से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने की अपील की है। पत्र के अंत में कहा गया है कि मीडिया पर दबाव डालना लोकतंत्र के लिए खतरनाक है, खासकर ऐसे समय में जब राज्य में चुनाव नजदीक हैं।
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