Kullu: कुल्लू दशहरा 2025 : रथयात्रा, नाट्योत्सव और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भव्य तैयारियाँ शुरू

हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर और आस्था का प्रतीक कुल्लू दशहरा विश्वभर में अपनी अलग पहचान रखता है। यह पर्व केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि पर्यटन और संस्कृति के संगम के रूप में भी खास महत्व रखता है। हर साल हजारों की संख्या में लोग कुल्लू पहुंचते हैं ताकि देव संस्कृति, लोक कला और भव्य रथयात्रा का आनंद ले सकें। वर्ष 2025 का कुल्लू दशहरा एक बार फिर भव्य आयोजन के लिए तैयार है और प्रशासन ने इसकी तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है।

30 सितंबर 2025 को उपायुक्त कुल्लू ने दशहरा की तैयारियों का जायजा लेते हुए रथ मैदान और लालचंद प्रार्थी कला केंद्र का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि रथयात्रा के लिए आवश्यक कार्य शीघ्र पूरे किए जाएं और कला केंद्र की मरम्मत का काम भी समय पर पूरा किया जाए ताकि सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ बिना किसी रुकावट के हो सकें। इस बार का दशहरा धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक विविधताओं और साहित्यिक कार्यक्रमों से भी खास बनने वाला है।

कुल्लू दशहरा की सबसे बड़ी पहचान भगवान रघुनाथ की रथयात्रा है। यह रथयात्रा लोगों की आस्था का केंद्र होती है और इसमें देश-विदेश से आए पर्यटक भी शामिल होते हैं। इस बार भी रथयात्रा को भव्य बनाने की तैयारियाँ चल रही हैं। प्रशासन इस बात पर विशेष ध्यान दे रहा है कि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को किसी तरह की असुविधा न हो और सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत रहे।

कुल्लू दशहरा का आयोजन केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं देखा जाता बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को भी मजबूती देता है। दशहरा के दौरान होटलों और होमस्टे में पर्यटकों की संख्या बढ़ जाती है, जिससे स्थानीय लोगों की आय में इज़ाफ़ा होता है। इसी तरह हस्तशिल्प, कारीगरी और बागवानी उत्पादों की बिक्री भी बढ़ती है। सेब और अन्य कृषि उत्पादों की मांग भी इस समय तेज हो जाती है। सरकार और प्रशासन इस आयोजन को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं ताकि यहां आने वाले पर्यटक सकारात्मक अनुभव लेकर जाएं।

इस बार कुल्लू दशहरा में भाषा एवं संस्कृति विभाग के सहयोग से नाट्योत्सव का आयोजन भी होगा। यह कार्यक्रम 5 और 6 अक्टूबर को अटल सदन में शाम 4 बजे आयोजित किया जाएगा। 5 अक्टूबर को दृष्टि ग्रुप गांधीनगर द्वारा ‘चिड़ियों का अनशन’ लघु नाटक, रेनबो ग्रुप द्वारा ‘अंग्रेजों भारत मत छोड़ो’, भुलंग रंगसभा समूह द्वारा ‘चांद कुल्लवी’ और शमशी नाट्य श्रेष्ठ संस्था द्वारा ‘बूढ़ी काकी’ का मंचन होगा। अगले दिन 6 अक्टूबर को ऐक्टिव मोनाल ग्रुप कुल्लू हास्य नाटक ‘बिच्छू’ का मंचन करेगा। इन प्रस्तुतियों के जरिए समाजिक संदेश, लोक संस्कृति और हास्य-व्यंग्य का सुंदर संगम देखने को मिलेगा।

कुल्लू दशहरा के दौरान केवल नाटक ही नहीं बल्कि शास्त्रीय संगीत और कवि सम्मेलन का आयोजन भी होगा। 3 अक्टूबर 2025 को देव सदन में प्रातः 10 बजे से कवि सम्मेलन और शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुतियाँ होंगी। इस कार्यक्रम में जिले के वरिष्ठ और नवोदित कवि अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करेंगे। कवि सम्मेलन और शास्त्रीय संगीत से कुल्लू की संस्कृति और साहित्यिक परंपरा को नई ऊर्जा मिलेगी।



दशहरा उत्सव समिति और प्रशासन का मुख्य उद्देश्य इस बार के आयोजन को और भी सुव्यवस्थित और भव्य बनाना है। उपायुक्त कुल्लू ने साफ कहा है कि सभी कार्य समय पर पूरे किए जाएं ताकि किसी प्रकार की समस्या न आए। रथयात्रा के लिए रथ मैदान को मजबूत और सुरक्षित बनाया जा रहा है जबकि लालचंद प्रार्थी कला केंद्र की मरम्मत से कलाकारों को बेहतर मंच मिलेगा।

कुल्लू दशहरा की खासियत यह है कि यहां रावण दहन नहीं होता बल्कि भगवान रघुनाथ की शोभायात्रा और देवताओं का मिलन होता है। यह परंपरा इस उत्सव को और भी अद्वितीय बनाती है। इस दौरान कुल्लू घाटी में भक्ति, कला और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यही कारण है कि यह उत्सव न केवल हिमाचल बल्कि पूरे भारत और विदेशों में भी प्रसिद्ध है।

इस बार कुल्लू दशहरा 2025 धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक धरोहर और आधुनिक प्रबंधन का सुंदर मेल प्रस्तुत करेगा। रथयात्रा से लेकर नाट्योत्सव और कवि सम्मेलन तक हर कार्यक्रम लोगों को नई ऊर्जा और उत्साह से भर देगा। यह आयोजन न केवल कुल्लू की परंपरा को जीवित रखेगा बल्कि स्थानीय कलाकारों, किसानों और व्यापारियों के लिए भी नए अवसर लाएगा। कुल्लू दशहरा केवल एक पर्व नहीं बल्कि हिमाचल की पहचान है, जो हर साल अपनी संस्कृति और आस्था को विश्व पटल पर प्रदर्शित करता है।

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