हिमाचल प्रदेश के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार ने कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि तीन वर्षों में हिमाचल को देश का नंबर-वन स्वास्थ्य राज्य बनाने का दावा हकीकत नहीं, बल्कि जनता को गुमराह करने वाला भ्रम है। परमार ने कहा कि यह कोई ठोस नीति नहीं, बल्कि सफेद झूठ और भ्रामक प्रचार का हिस्सा है, जिसका जमीनी सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार सत्ता में आते ही भाजपा सरकार के कार्यकाल में शुरू की गईं गरीब-कल्याणकारी स्वास्थ्य योजनाओं को या तो जानबूझकर कमजोर कर दिया गया या फिर व्यवहारिक रूप से बंद कर दिया गया। यदि सरकार वास्तव में स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रदेश को नंबर-वन बनाने को लेकर गंभीर होती, तो पहले से सफल चल रही जनकल्याणकारी योजनाओं को और मजबूत किया जाता।
पूर्व मंत्री ने कहा कि मौजूदा हालात में नंबर-वन बनने की बात करना नहीं, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था के पतन को दर्शाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इस योजना के तहत हिमाचल के लाखों गरीब परिवारों को पांच लाख रुपये तक का पूरी तरह कैशलैस इलाज मिला, लेकिन अब हालात यह हैं कि अस्पतालों के भुगतान अटके हुए हैं। निजी अस्पताल धीरे-धीरे योजना से बाहर हो रहे हैं और गरीब मरीज एक बार फिर अपनी जेब से इलाज का खर्च उठाने को मजबूर हो रहे हैं।
विपिन परमार ने दावा किया कि भाजपा के डबल इंजन मॉडल के दौरान लगभग 4.5 लाख लोगों को मुफ्त इलाज की सुविधा दी गई और जुलाई 2022 तक प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं पर 463 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार को पहले स्वास्थ्य सेवाओं की मौजूदा हालत सुधारनी चाहिए, न कि हवा-हवाई दावों से जनता को भ्रमित करना चाहिए।
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