जिला ऊना के जंगलों में एक बार फिर तेंदुओं की मौजूदगी ने लोगों का ध्यान खींचा है। भले ही तेंदुओं को देखकर आम लोग भयभीत हो रहे हों, लेकिन विशेषज्ञ इसे मजबूत ईको सिस्टम का संकेत मान रहे हैं। ताजा मामला हरोली क्षेत्र के कांटे गांव का है, जहां एक साथ तेंदुओं का पूरा परिवार दिखाई दिया। चार तेंदुओं का यह कुनबा उस समय नजर आया, जब कुछ युवक कांटे के ऊपरी क्षेत्र में स्थित एक धार्मिक डेरे की ओर जा रहे थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पहले एक तेंदुआ सड़क पर नजर आया और कुछ ही पलों में उसके साथ तीन शावक भी दिखाई देने लगे। सभी तेंदुए सड़क पर बेफिक्र होकर खेलते रहे। कुछ देर तक गाड़ी को देखने के बाद वे झाड़ियों की ओर चले गए। इस दौरान युवकों ने पूरी घटना का वीडियो भी बना लिया, जो अब चर्चा में है।
हालांकि इस दृश्य के बाद इलाके के लोगों में डर का माहौल भी बना हुआ है और कई लोग जंगलों की ओर जाने से कतरा रहे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि हरोली क्षेत्र में यह तेंदुओं की मौजूदगी का तीसरा मामला है। इससे पहले भी एक तेंदुआ सड़क पर टहलता हुआ देखा गया था, जिसका वीडियो वाहन चालकों ने बनाया था। वह झाड़ियों में चला गया, लेकिन काफी देर तक वहीं खड़ा होकर वाहनों को देखता रहा।
इससे पहले हरोली के ही पालकवाह क्षेत्र में एक तेंदुआ रिहायशी इलाके में घुस आया था, जहां उसकी लोगों से झड़प भी हुई थी और कुछ लोग घायल हो गए थे। बाद में वन विभाग की टीम ने ट्रैंकुलाइजर गन की मदद से तेंदुए को बेहोश कर उसे जू भेज दिया था। इसी तरह हाल ही में कुटलैहड़ के डंगेहड़ा-कुरियाला क्षेत्र में भी एक तेंदुआ रिहायशी इलाके में पहुंचा था और पेड़ पर बैठ गया, लेकिन रेस्क्यू टीम के पहुंचने से पहले ही वह गायब हो गया।
हाल ही में हुए एक सर्वे में जिला ऊना में 30 से 35 तेंदुओं की मौजूदगी सामने आई है। यह सर्वे कोलकाता स्थित भारतीय प्राणी सर्वेक्षण संस्था द्वारा किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार जिले में प्रति दो वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में लगभग दो तेंदुए पाए गए, जिससे कुल संख्या 35 से अधिक आंकी गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार तेंदुओं की बढ़ती संख्या ईको सिस्टम के लिए फायदेमंद है। ये तेंदुए उन जीवों की संख्या को नियंत्रित करते हैं जो फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं और फूड चेन का अहम हिस्सा हैं। वनों में शिकार की घटनाओं में कमी आने के कारण भी तेंदुओं की संख्या बढ़ रही है। हालांकि इसके साथ ही आबादी वाले इलाकों में तेंदुओं के पहुंचने से लोगों के लिए खतरा भी बना रहता है।
वन विभाग के अधिकारी सुशील ठाकुर ने बताया कि कांटे गांव में दिखाई दिए तेंदुए एक ही परिवार के हैं, जिनमें मादा तेंदुआ और उसके शावक शामिल हैं। उन्होंने इसे ईको सिस्टम के लिए खुशी की बात बताया। उन्होंने कहा कि ऊना जिले में न सिर्फ तेंदुए बल्कि अन्य संरक्षित वन्य प्रजातियां भी नजर आ रही हैं, जो वन्य जीव संरक्षण की दिशा में सकारात्मक संकेत हैं। डीएफओ के अनुसार स्वां नदी और गोबिंदसागर झील क्षेत्र में विदेशी पक्षियों की भी बड़ी संख्या देखी जा रही है, जो हजारों किलोमीटर का सफर तय कर यहां पहुंचते हैं और इन्हें बर्ड वॉचर के लिए खास माना जाता है।
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