हिमाचल प्रदेश के उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए बजट पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि यह बजट हिमाचल प्रदेश के हितों के साथ सीधा धोखा है और इसमें पहाड़ी राज्यों की विशेष भौगोलिक और आर्थिक परिस्थितियों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। उप मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि बजट में हिमाचल के साथ अन्याय किया गया है, जिसका असर राज्य के विकास पर साफ तौर पर दिखाई देगा।
मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि केंद्र सरकार का यह रवैया संघीय ढांचे की भावना के बिल्कुल विपरीत है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस बजट का सीधा और गंभीर प्रभाव राज्य के विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं और वित्तीय स्थिरता पर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि 15वें वित्त आयोग की अवधि के दौरान वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक हिमाचल प्रदेश को केंद्र से लगभग 38 हजार करोड़ रुपये का राजस्व घाटा अनुदान मिला था, जो राज्य के लिए बेहद अहम था।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि अब इस महत्वपूर्ण सहायता को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है, जबकि राज्य को उम्मीद थी कि उसकी विषम भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित संसाधनों को देखते हुए इस अनुदान में बढ़ोतरी की जाएगी। उन्होंने इसे हिमाचल प्रदेश के साथ अन्याय करार दिया।
मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि नॉर्थ ईस्ट, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों को मिलने वाले विशेष अनुदानों को खत्म करना न केवल विकास कार्यों को प्रभावित करेगा, बल्कि जनहित से जुड़ी योजनाओं और राज्य के वित्तीय संतुलन के सामने भी गंभीर चुनौतियां खड़ी करेगा।
उप मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से बजट प्रावधानों पर पुनर्विचार की मांग करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश को उसके संवैधानिक अधिकारों और वास्तविक जरूरतों के अनुरूप न्यायसंगत बजटीय सहयोग मिलना चाहिए, ताकि राज्य विकास की रफ्तार बनाए रख सके और आम जनता को योजनाओं का पूरा लाभ मिल सके।
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