अपने इकलौते बेटे को खो देने के दर्द के बीच भी शहीद विंग कमांडर नमांश स्याल के पिता जगन्नाथ स्याल का हौसला और देशभक्ति कम नहीं हुई है। वे चाहते हैं कि उनकी पोती आर्य आगे चलकर अपने पिता की तरह फाइटर पायलट बने और उनके अधूरे सपनों को पूरा करे। उनका कहना है कि बचपन से ही नमांश को जहाज उड़ाने का जुनून था, और लगातार मेहनत कर उसने वह मुकाम हासिल किया था जिसे हर कोई नहीं छू पाता।
जगन्नाथ स्याल ने बताया कि दुबई एयर शो में नमांश के शानदार हवाई करतबों की प्रशंसा सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि पाकिस्तानी पायलटों ने भी खुले दिल से की थी। दुख जताते हुए उन्होंने कहा कि यह सब कुछ महज चंद सेकंड में हो गया। शो खत्म होने में कुछ ही घंटे बचे थे, और उनका बेटा छह दिनों से लगातार देश का नाम रोशन कर रहा था।
उन्होंने साफ कहा कि वे अपने बेटे की शहादत को किसी तरह कैश नहीं करना चाहते और न ही शहादत की कोई मांग होती है। यदि सरकार शहीद की याद में कोई स्मारक बनाकर सम्मान देना चाहे, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। नमांश की शहादत के बाद माता-पिता के सपने बिखर गए हैं, वहीं पत्नी अफसान अख्तर के परिवार की उम्मीदें भी टूट गईं, क्योंकि वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं। नमांश दो परिवारों का सहारा था, क्योंकि उसकी बहन प्रिया की शादी हो चुकी है।
बुधवार को नमांश के पैतृक गांव पटियालकड़ में श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया। बड़ी संख्या में लोग शामिल होकर शहीद को अंतिम विदाई देते हुए पहुंचे। पारिवारिक व्यस्तताओं के कारण सभी रस्में जल्द पूरी करनी पड़ीं। पिता जगन्नाथ कुछ समय गांव में रहेंगे, जबकि बाकी सदस्य वीरवार को कोयम्बटूर के लिए रवाना होंगे।
इससे पहले हमीरपुर के सांसद अनुराग ठाकुर और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी शहीद के घर पहुंचे। दोनों नेताओं ने नमांश को श्रद्धांजलि दी और परिवार की हिम्मत की सराहना की। उन्होंने कहा कि बेटी को फाइटर पायलट बनाने का पिता का संकल्प, वीरभूमि हिमाचल की सच्ची पहचान है।
मंगलवार को भी नमांश के दोस्तों और सहपाठियों का उनके घर पर दिनभर आना-जाना लगा रहा। सभी ने नमांश के साथ बिताए यादगार पलों को साझा करते हुए उसे भावुक शब्दों में याद किया।
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