हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा की जवाली विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव जोल में उस समय शोक की लहर दौड़ गई, जब भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवान अंकज कुमार का तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर उनके पैतृक घर पहुंचा। जैसे ही उनकी देह गांव पहुंची, परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया और हर आंख नम हो उठी। अंकज कुमार उत्तराखंड के अल्मोड़ा में आईटीबीपी में चालक के पद पर कार्यरत थे और बुधवार को ब्रेन स्ट्रोक आने के कारण उनका दुखद निधन हो गया था।

शुक्रवार को जब उनका पार्थिव शरीर गांव लाया गया तो उनके माता-पिता, पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल था। शहीद की पत्नी सपना देवी ने अपने पति को उस लाल जोड़े में अंतिम विदाई दी, जो उन्होंने शादी के समय पहना था। यह पल हर किसी के दिल को छू गया। वहीं उनके पिता ठाकुर सिंह ने अपने बेटे को सैल्यूट कर विदाई दी, जिससे वहां मौजूद सभी की आंखें भर आईं।

शहीद के बेटे आदित्य (10 वर्ष) और सूर्यांश (8 वर्ष) मासूम निगाहों से अपने पिता की पार्थिव देह को देखते रहे। शायद उन्हें अभी इस बात का पूरा एहसास नहीं था कि उनके सिर से हमेशा के लिए पिता का साया उठ चुका है। वे चुपचाप अपने पिता को निहारते रहे, जैसे उन्हें अभी भी उम्मीद हो कि वे जाग उठेंगे।

पार्थिव शरीर को श्मशान घाट तक ले जाया गया, जहां नायब तहसीलदार कोटला कोविंदर चौहान, भाजपा नेता संजय गुलेरिया और पूर्व विधायक अर्जुन ठाकुर ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। श्मशान घाट पर आईटीबीपी की उस टुकड़ी ने हवाई फायर कर अंतिम सलामी दी, जो पार्थिव शरीर को लेकर गांव पहुंची थी। जवान अंकज कुमार का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। उनके बड़े बेटे आदित्य ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। इस दुखद घड़ी में क्षेत्र के सैकड़ों लोग शहीद को अंतिम विदाई देने पहुंचे और नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित की।

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