Shimla: आउटसोर्स कर्मचारियों पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से पूछा– क्या किसी की सेवाएं हुईं नियमित?

प्रदेश हाईकोर्ट ने आउटसोर्स कर्मचारियों को लेकर प्रदेश सरकार से अहम सवाल पूछे हैं। कोर्ट ने जानना चाहा है कि क्या आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित करने के लिए सरकार की कोई पॉलिसी फिलहाल लागू है या नहीं। इसके साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट रूप से पूछा है कि अब तक किसी भी आउटसोर्स कर्मचारी को नियमित किया गया है या नहीं। यह टिप्पणी आउटसोर्स कर्मियों की सेवाओं की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के दौरान की गई।

मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने कहा कि यह जानकारी बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे मामले के मूल मुद्दे पर फैसला लेने में अदालत को मदद मिलेगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि असल सवाल यह है कि क्या स्वीकृत पदों को आउटसोर्सिंग के जरिए भरा जा सकता है, जबकि नियम इसकी अनुमति नहीं देते।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि एचपी फाइनेंशियल रूल्स, 2009 का नियम-112 सरकार के पक्ष में नहीं जाता, क्योंकि यह केवल आपातकालीन स्थिति के लिए बनाया गया नियम है। अदालत ने टिप्पणी की कि बड़े पैमाने पर रोजगार देने के लिए आउटसोर्सिंग का सहारा लेना संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ है। इससे न सिर्फ आउटसोर्स कर्मचारियों का शोषण होता है, बल्कि उन्हें नियमित कर्मचारियों की तुलना में काफी कम वेतन दिया जाता है, जबकि नियमित कर्मचारियों को नियमों के तहत निर्धारित पे-स्केल मिलता है। कोर्ट ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का स्पष्ट उल्लंघन बताया।

स्वास्थ्य सेवाओं में आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति पर टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 21 का भी उल्लंघन है, जो मरीजों के जीवन के अधिकार से जुड़ा है। अदालत ने कहा कि अस्पतालों में भर्ती मरीजों को ऐसे आउटसोर्स स्टाफ नर्सों से सेवाएं लेनी पड़ती हैं, जिन पर किसी भी प्रकार का विभागीय नियंत्रण नहीं होता। उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई संभव नहीं होती और कथित एजेंसियों की संतुष्टि न होने पर केवल सेवाएं समाप्त कर दी जाती हैं।

हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह शपथ पत्र के माध्यम से यह बताए कि प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में कितने नियमित स्टाफ नर्सों के पद भरे गए हैं, ताकि राज्य की बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति प्रतिबद्धता स्पष्ट हो सके। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी पूछा है कि विभागवार कितने आउटसोर्स कर्मचारी अभी सेवा में हैं और वे किस अवधि से कार्यरत हैं।

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