Himachal: भूकंप के सबसे खतरनाक जोन में आया पूरा हिमाचल, नए मानचित्र ने बढ़ाई चिंता

भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा जारी संशोधित राष्ट्रीय भूकंपीय जोनेशन मानचित्र में पूरे हिमाचल प्रदेश को नए स्थापित जोन-6 में शामिल कर दिया गया है। इसके साथ ही प्रदेश अब देश में भूकंप के सबसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में आ गया है। इससे पहले हिमाचल के अलग-अलग जिले जोन-4 और जोन-5 में आते थे, लेकिन नए मानचित्र के अनुसार अब सभी जिलों को एक साथ जोन-6 में रखा गया है। इस बदलाव से पहले मौजूद क्षेत्रीय अंतर पूरी तरह खत्म हो गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस नए वर्गीकरण के बाद हिमाचल में आपदा प्रबंधन, सुरक्षित निर्माण और भूकंप रोधी ढांचागत योजना पर और ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होगी। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) द्वारा तैयार किए गए एक भूकंप परिदृश्य के अनुसार यदि प्रदेश में आधी रात के समय 8.0 तीव्रता का भूकंप आता है तो वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर करीब 68,56,509 लोगों की आबादी प्रभावित हो सकती है। अनुमान है कि ऐसी स्थिति में लगभग 1,60,000 लोगों की मौत और करीब 11 लाख लोगों के घायल होने की आशंका जताई गई है।

संभावित नुकसान को कम करने के लिए विशेषज्ञों ने कई अहम सुझाव भी दिए हैं। इनमें जल निकासी व्यवस्था को मजबूत बनाना, जल निकासी मार्गों से अतिक्रमण हटाना, असुरक्षित स्थानों पर निर्माण को रोकना और पहाड़ियों तथा ढलानों की स्थिरता सुनिश्चित करना शामिल है। विशेषज्ञों का कहना है कि हमारे पूर्वजों ने भी आपदाओं के अनुभव के आधार पर सुरक्षित निर्माण तकनीकें विकसित की थीं। धज्जी दीवार और काष्ठकूणी शैली से बने पारंपरिक मकान इसके उदाहरण हैं, जिन्हें भूकंप के झटकों को सहने में अधिक सक्षम माना जाता है। आधुनिक समय में इन तकनीकों को बढ़ावा देते हुए लकड़ी की जगह आरसीसी का उपयोग भी किया जा सकता है।

सुरक्षित निर्माण के दिशा-निर्देश लोगों तक पहुंचाने के लिए हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) ने हिम कवच नाम का एक मोबाइल एप भी तैयार किया है। यह एप ग्रामीण क्षेत्रों के मकान मालिकों, पंचायती राज और ग्रामीण विकास विभाग के इंजीनियरों तथा तकनीकी विशेषज्ञों को भवन निर्माण से जुड़े जरूरी दिशा-निर्देश आसानी से उपलब्ध कराता है। इसके जरिए निर्माण के हर चरण में सुरक्षित और आपदा-रोधी भवन निर्माण पद्धतियों को अपनाने में मदद मिलती है।

इसी के साथ प्रदेश में 4 अप्रैल को कांगड़ा भूकंप की 121वीं बरसी पर आपदा जागरूकता दिवस भी मनाया जाएगा। इस दिन राज्य, जिला और समुदाय स्तर पर विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा 1 से 5 अप्रैल तक शिक्षण संस्थानों में आपदा जागरूकता से जुड़े प्रशिक्षण और अन्य गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी।

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