Himachal: हिमाचल प्रदेश में मानसून की मार: सिरमौर में सर्वाधिक वर्षा, आठ जिलों में फ्लैश फ्लड का येलो अलर्ट जारी

हिमाचल प्रदेश में मानसून सीजन ने एक बार फिर सेषणकारी रूप ले लिया है। मंगलवार को सिरमौर जिला मुख्यालय नाहन में सबसे अधिक 70 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि राजधानी शिमला में हल्की वर्षा हुई। अन्य इलाकों में भी वर्षा का दौर जारी रहा – धर्मशाला में 4 मिमी, मनाली में 12 मिमी, कांगड़ा में 5 मिमी, बिलासपुर में 0.5 मिमी, हमीरपुर में 2 मिमी और धौलाकुंआ में 22.5 मिमी बारिश दर्ज की गई। तापमान की बात करें तो नेरी में अधिकतम तापमान 35 डिग्री, ऊना में 34.2 डिग्री और शिमला में 23.6 डिग्री सेल्सियस रहा।

सोमवार की रात भी प्रदेश के कई क्षेत्रों में अच्छी बारिश हुई। पच्छाद में 10, गोहर में 9, बैजनाथ में 6, नाहन व पांवटा साहिब में 5-5, नयना देवी, रेणुका/ददाहू में 4-4, कसौली और राजगढ़ में 3-3, जोगिंद्रनगर और पालमपुर में 3-3, शिमला में 2, धर्मपुर (सोलन), कांगड़ा, मंडी और जाटो बैराज में 1-1 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई। लगातार हो रही वर्षा के चलते राज्य के नदी-नालों का जलस्तर बढ़ गया है। मौसम विभाग ने चम्बा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला, सिरमौर, सोलन और ऊना जिलों में फ्लैश फ्लड के खतरे को देखते हुए येलो अलर्ट जारी किया है। 14 जुलाई तक प्रदेश के निचले और मध्यवर्ती क्षेत्रों में भारी वर्षा की संभावना जताई गई है, जबकि ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्रों में इसका असर अपेक्षाकृत कम रहेगा।

लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण प्रदेशभर में जरूरी सुविधाएं बाधित हुई हैं। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार, मंगलवार तक कुल 227 सड़कें पूरी तरह बंद हैं। 163 बिजली ट्रांसफार्मर बंद पड़े हैं और 174 जलापूर्ति योजनाएं प्रभावित हुई हैं। मंडी जिला सबसे ज्यादा प्रभावित रहा है, जहां 153 सड़कें, 140 ट्रांसफार्मर और 158 पेयजल योजनाएं बंद पड़ी हैं। स्थिति को सुधारने के लिए प्रशासन मशीनरी और लेबर की मदद से राहत और बहाली के काम में जुटा हुआ है।

इस मानसून सीजन में अब तक प्रदेश को भारी जान-माल का नुकसान हुआ है। 20 जून से अब तक बारिश और उससे जुड़ी घटनाओं में कुल 80 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 128 लोग घायल और 35 लोग लापता हैं। प्रदेश में अब तक 164 मकान पूरी तरह तथा 191 आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इसके अलावा 364 गौशालाएं और 27 दुकानें भी बारिश और भूस्खलन की चपेट में आई हैं। पशुधन को भी भारी नुकसान हुआ है, जिसमें अब तक 254 मवेशी और 10,000 पोल्ट्री पक्षी मारे गए हैं।

राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार अब तक हिमाचल को कुल 692 करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान हो चुका है। इसमें सबसे अधिक नुकसान जल शक्ति विभाग को 391 करोड़ रुपये और लोक निर्माण विभाग को 292 करोड़ रुपये का हुआ है। मंडी जिला सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में शामिल है, जहां 30 जून की रात को 12 स्थानों पर बादल फटने की घटनाएं हुई थीं। इन घटनाओं ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया। मंडी में अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है और 28 लोग लापता हैं।

प्रदेशभर में बादल फटने से 14, बाढ़ से 8, पानी में बहने से 8, पहाड़ी से गिरने से 9, करंट लगने से 4 और सड़क हादसों में 28 लोगों की मौत हुई है। मौसम विभाग की चेतावनियों को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से सावधानी बरतने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है।

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