हिमाचल प्रदेश करुणामूलक संघ के प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र अत्री ने वीरवार को धर्मशाला में आयोजित प्रेस वार्ता में प्रदेश सरकार से करुणामूलक आधार पर नौकरी की मांग को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिन आश्रितों की वार्षिक आय सीमा 3 लाख रुपए से अधिक है, उन्हें भी नौकरी का अवसर दिया जाना चाहिए, क्योंकि कई आश्रित पिछले लगभग 20 वर्षों से नौकरी का इंतजार कर रहे हैं। सरकारी उदासीनता के कारण कई पात्र आश्रित अब ओवरएज हो चुके हैं, जिससे उनके सामने भविष्य को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
रविंद्र अत्री ने बताया कि पूरे हिमाचल प्रदेश में करुणामूलक आश्रितों के करीब 3234 मामले लंबित हैं। प्रदेश सरकार द्वारा वार्षिक आय सीमा 3 लाख रुपए तय करने के बाद लगभग 1500 आश्रित नौकरी के लिए पात्र हो गए हैं, जबकि लगभग 1500 आश्रित इस सीमा से बाहर हो गए हैं। इससे बड़ी संख्या में परिवारों को राहत मिलने की बजाय निराशा का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले करुणामूलक आश्रितों से वादा किया था कि सरकार बनने के बाद सभी पात्र आश्रितों को बिना किसी शर्त के वन टाइम सैटलमेंट के तहत एकमुश्त नौकरी दी जाएगी। लेकिन अब सरकार अपने इस वादे से पीछे हटती नजर आ रही है। उन्होंने कहा कि करुणामूलक आश्रित लंबे समय से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं और सरकार को उनके लिए स्थायी और स्पष्ट नीति बनानी चाहिए।
करुणामूलक संघ ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि सभी आश्रितों को बिना किसी भेदभाव और शर्त के एकमुश्त नौकरी प्रदान की जाए। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द उनकी मांगों को पूरा नहीं किया तो करुणामूलक आश्रित आंदोलन शुरू करेंगे और विधानसभा सत्र के दौरान विधानसभा का घेराव भी किया जाएगा।
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