Himachal: हिमाचली उत्पादों को मिलेगी नई पहचान, सीएम सुक्खू ने किया हिम-एमएसएमई फेस्ट 2026 का आगाज़

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि प्रदेश सरकार हिमाचली उत्पादों को देश और दुनिया में नई पहचान दिलाने के लिए “हिम ब्रांड” नाम को लगातार प्रमोट कर रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हिमाचली उत्पादों की एक अलग पहचान बने और वे देशभर में लोकप्रिय हों। मुख्यमंत्री ने यह बात शिमला के रिज मैदान में आयोजित हिम-एमएसएमई फेस्ट 2026 के शुभारंभ अवसर पर कही। इस दौरान उन्होंने कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया और विभिन्न उद्यमियों को सम्मानित भी किया।

मुख्यमंत्री ने फैस्ट में लगे विभिन्न उद्यमियों के स्टॉल का उद्घाटन और निरीक्षण किया तथा उत्पादों में गहरी रुचि दिखाई। उन्होंने कहा कि यह फैस्ट केवल एक प्रदर्शनी नहीं है, बल्कि प्रदेश के हजारों छोटे उद्यमियों, कारीगरों और नवोदित उद्यमों के लिए अवसरों का मजबूत मंच है। यह आयोजन “मेड इन हिमाचल” ब्रांड को आगे बढ़ाते हुए ग्रामीण, पारंपरिक और स्थानीय एमएसएमई उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में सहायक होगा।

उन्होंने कहा कि हिम-एमएसएमई फेस्ट प्रदेश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र को सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम पहल है। एमएसएमई प्रदर्शन संवर्धन एवं तीव्रता कार्यक्रम के माध्यम से उद्यमों को क्षमता निर्माण, वित्तीय सहायता और बाजार तक पहुंच प्रदान की जाएगी, ताकि वे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य हिमाचल प्रदेश को देश का सबसे समृद्ध और आत्मनिर्भर राज्य बनाना है और यह फैस्ट उस संकल्प को मजबूती देता है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि फैस्ट के तहत एमएसएमई के हरितकरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिससे प्रदूषण कम होगा, ऊर्जा दक्षता बढ़ेगी और परिपत्र अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। यह पहल हिमाचल को हरित ऊर्जा राज्य बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कारीगरों द्वारा हाथ से बनाई गई शॉल के प्रदर्शन को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान मिला है, जो हिमाचल के लिए गर्व की बात है और इससे हिमाचली उत्पादों को वैश्विक पहचान मिली है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फैस्ट नवाचार, निवेश और नए विचारों का संगम है, जिससे प्रदेश में स्टार्टअप और नवोदित उद्यम संस्कृति को नई ऊर्जा मिलेगी। आयोजन के दौरान महिला उद्यमिता और एक जिला एक उत्पाद योजना पर विशेष फोकस रहेगा। महिला उद्यमियों के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे, जहां नेटवर्किंग और अनुभव साझा करने के अवसर मिलेंगे।

उन्होंने जानकारी दी कि बीते तीन वर्षों में प्रदेश सरकार ने दुबई, जापान और मुंबई जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में निवेशकों के साथ बैठकें की हैं। इसके परिणामस्वरूप 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के एमओयू साइन किए गए हैं। इसके अलावा 14,000 करोड़ रुपये की 683 औद्योगिक परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिससे करीब 32,000 लोगों को रोजगार मिलेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में एमएसएमई को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार को 1,642 करोड़ रुपये के प्रस्ताव भेजे गए हैं, जिनमें से 109 करोड़ 34 लाख रुपये अब तक स्वीकृत हो चुके हैं।

उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए तीन दिवसीय फैस्ट की गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फैस्ट के दौरान महिला उद्यमियों से संवाद सत्र भी आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ग्रीन मोबिलिटी, डिफेंस, फार्मास्यूटिकल, डेयरी, फूड प्रोसेसिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रॉनिक चिप और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है।

अतिरिक्त मुख्य सचिव आर.डी. नजीम ने प्रदेश में स्टार्टअप, उद्योग विकास और विभागीय योजनाओं की जानकारी दी। भारत सरकार के एमएसएमई मंत्रालय के विकास आयुक्त डॉ. रजनीश ने प्रदेश सरकार के प्रयासों की सराहना की। आयुक्त उद्योग डॉ. यूनुस ने फैस्ट और प्रदेश में उद्योग विकास से जुड़ी जानकारियां साझा कीं। इस मौके पर उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, विधायक मलेन्द्र राजन और विवेक शर्मा, शिमला नगर निगम के महापौर सुरेंद्र चौहान, राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष डॉ. एसपी कत्याल, मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान, पार्षद और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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