धर्मशाला, 30 मई। कांगड़ा जिले में विकास परियोजनाओं की रफ्तार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने वन स्वीकृति मामलों के शीघ्र निपटारे की दिशा में गंभीर कदम उठाए हैं। उपायुक्त हेमराज बैरवा ने वीरवार को उपायुक्त कार्यालय धर्मशाला के सभागार में आयोजित जिला स्तरीय समन्वय समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे वन संरक्षण अधिनियम (एफसीए) के अंतर्गत आने वाले मामलों को शीघ्रता से निपटाएं।
बैठक के दौरान उपायुक्त ने एफसीए और एफआरए (वन अधिकार अधिनियम) से संबंधित विकास परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति और प्रगति की विभागवार समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से यह जानने का प्रयास किया कि मंजूरी में देरी के क्या कारण हैं, किन मामलों में आपत्तियां दर्ज हैं और उनके समाधान के लिए अब तक क्या प्रयास किए गए हैं। उपायुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि कई बार आवेदन अधूरी जानकारी या गलत प्रक्रिया के कारण मंजूरी के स्तर पर अटक जाते हैं, जिससे विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न होती है। उन्होंने कहा कि सभी विभागों को एफसीए और एफआरए से संबंधित प्रक्रियाओं की स्पष्ट समझ होनी चाहिए ताकि स्वीकृति प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।
इस मौके पर उपायुक्त ने यह आश्वासन दिया कि जिला प्रशासन वन भूमि और गैर-वन भूमि की पहचान करने के कार्य में संबंधित विभागों को पूरा सहयोग देगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन इस दिशा में तत्परता से कार्य करेगा ताकि आवश्यक मंजूरियों में किसी प्रकार की बाधा न आए। बैठक में डीएफओ मुख्यालय राहुल कुमार ने उपायुक्त का स्वागत करते हुए एफसीए से जुड़े मामलों की विस्तृत जानकारी साझा की। समीक्षा के दौरान धर्मशाला वन मंडल के 32, नूरपुर के 21, पालमपुर के 12 और देहरा वन मंडल के 13 प्रकरणों की समीक्षा की गई। इसके अलावा, कुछ नए मामलों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
इस बैठक में लोक निर्माण, जल शक्ति, शिक्षा, पर्यटन और उद्योग विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी विभागों ने आपसी समन्वय से लंबित मामलों के त्वरित समाधान पर सहमति जताई, जिससे जिले में विकास कार्यों को गति मिल सके।
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