Kangra: धर्मशाला में वैश्विक एकजुटता का संदेश, दलाई लामा के नोबेल शांति पुरस्कार की 36वीं वर्षगांठ पर जुटे दुनिया भर के सांसद

धर्मशाला में सोमवार सुबह तिब्बती समुदाय और दुनिया भर से आए सांसदों व प्रतिनिधिमंडलों ने केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के नेतृत्व में तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा को वर्ष 1989 में मिले नोबेल शांति पुरस्कार की 36वीं वर्षगांठ मनाई। इस मौके पर ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, फिजी, चिली, चेक रिपब्लिक, फ्रांस और इटली से आए उच्च स्तरीय प्रतिनिधि धर्मशाला पहुंचे। कार्यक्रम से पहले इन देशों के सांसदों और प्रतिनिधियों ने दलाई लामा से उनके निवास स्थान पर मुलाकात की और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।

वर्षगांठ समारोह की शुरुआत तिब्बती और भारतीय राष्ट्रगान के साथ हुई। इसके बाद निर्वासित तिब्बती प्रधानमंत्री यानी सिक्योंग पेंपा सेरिंग ने संबोधन दिया। कार्यक्रम में शामिल विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने अपने वक्तव्यों में दलाई लामा के जीवन, करुणा के संदेश, तिब्बती पहचान की रक्षा और वैश्विक शांति के लिए उनके योगदान की खुलकर सराहना की।

कार्यक्रम के दौरान फिजी के सांसद वीरेंद्र लाल ने दलाई लामा की आजीवन नैतिक नेतृत्व क्षमता और दृढ़ संकल्प को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि दलाई लामा के 90वें जन्मदिवस के अवसर पर उनके करुणा और शांति के संदेश का महत्व और भी बढ़ जाता है।

न्यूजीलैंड के सांसद ग्रेग फ्लेमिंग ने तिब्बती संस्कृति और भाषा के संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि आपकी रोशनी कभी मंद नहीं होगी। उन्होंने तिब्बती समुदाय से अपनी भाषा, संस्कृति और आस्था को बनाए रखने का आह्वान किया।

फ्रांस की सांसद सामंथा काजेबोन ने कहा कि दलाई लामा से मुलाकात ने एक बार फिर साबित कर दिया कि शांति संवाद, सहानुभूति और मानवीय गरिमा से ही आकार लेती है। उन्होंने तिब्बती जनता की शांतिपूर्ण आकांक्षाओं के प्रति अपना समर्थन दोहराया।

इस अवसर पर मुख्य न्याय आयुक्त येशी वांगमो, तिब्बती संसद के स्पीकर सोनम तेनफेल, सिक्योंग पेंपा छेरिंग, उप सभापति डोलमा सेरिंग टेयखांग, विभिन्न कालोन, तिब्बती संसद की स्थायी समिति के सदस्य और तिब्बती स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

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