धर्मशाला, 17 फरवरी: कांगड़ा जिले के शाहपुर से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित धारकंडी क्षेत्र की बोह घाटी अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए पहले से ही प्रसिद्ध रही है, लेकिन अब यह घाटी एक नई पहचान बनाने की ओर बढ़ रही है। खबरू वाटरफॉल की कलकल ध्वनि, बर्फ से ढकी पहाड़ियां और घने जंगलों के बीच बसी यह घाटी अब प्रदेश के पहले ट्राउट हब के रूप में विकसित हो रही है, जिससे पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
शाहपुर के विधायक और उपमुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने बताया कि उन्होंने अपनी पहली विधायक प्राथमिकता बैठक में मुख्यमंत्री से धारकंडी क्षेत्र में ट्राउट हब स्थापित करने का आग्रह किया था। मुख्यमंत्री ने अपने पहले ही बजट में इस मांग को स्वीकार करते हुए ट्राउट हब स्थापित करने की घोषणा की। अब यह परियोजना जमीन पर उतर चुकी है और इसके लिए 3.03 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। अधिकांश निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और बोह में ट्राउट हैचरी भी बनकर तैयार हो गई है।

इस ट्राउट हब के बनने से क्षेत्र के लोगों को स्वरोजगार के नए अवसर मिलेंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। विधायक पठानिया ने लोगों से अपील की है कि वे ट्राउट रेसवेज का निर्माण कर इस पर्यावरण-अनुकूल व्यवसाय को अपनाएं। विपणन सुविधा को बेहतर बनाने के लिए विभाग द्वारा पांच मोटरसाइकिलें आइस बॉक्स सहित उपलब्ध कराई गई हैं और एक अतिरिक्त मोटरसाइकिल भी जल्द दी जाएगी। इसके अलावा शाहपुर और धर्मशाला में दो फिश कियोस्क स्थापित करने का सुझाव भी दिया गया है, जिससे उत्पाद को बाजार तक पहुंचाना आसान होगा।
स्थानीय स्तर पर भी इस परियोजना का सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। बोह निवासी पप्पू राम और उनकी पत्नी नीलम देवी ने 38 लाख रुपये की लागत से ‘बोह वैली फिश फार्म एंड हैचरी’ स्थापित की है। उन्हें प्रदेश सरकार से 15 लाख रुपये की सब्सिडी मिली है। उनका कहना है कि सरकारी सहयोग से उनका यह सपना साकार हुआ है और अब हैचरी में ट्राउट का बीज डाला जा चुका है। उन्होंने युवाओं से स्वरोजगार अपनाने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की है।

मत्स्य विभाग पालमपुर के सहायक निदेशक डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि धारकंडी घाटी ट्राउट पालन के लिए बेहद उपयुक्त क्षेत्र है। अभी तक 15 से 20 लोग अपने तालाब बनाकर ट्राउट उत्पादन शुरू कर चुके हैं। नई हैचरी बनने से अब स्थानीय स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण ट्राउट बीज उपलब्ध होगा। इसके लिए डेनमार्क से उच्च गुणवत्ता का ट्राउट बीज भी मंगवाया गया है। इस परियोजना के तहत 3.03 करोड़ रुपये में से अब तक 211.50 लाख रुपये की योजनाएं स्वीकृत की जा चुकी हैं, जिनमें ट्राउट रेसवेज, मोटरसाइकिल और फिश कियोस्क शामिल हैं। कई कार्य पूरे हो चुके हैं और बाकी कार्य तेजी से चल रहे हैं।
बोह घाटी में ट्राउट हब बनने से यह क्षेत्र अब केवल पर्यटन के लिए ही नहीं, बल्कि स्वरोजगार और ग्रामीण विकास के नए केंद्र के रूप में भी उभर रहा है। यह परियोजना प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग और सरकारी सहयोग से स्थानीय युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।
For advertisements inquiries on HIM Live TV, Kindly contact us!
Connect with us on Facebook and WhatsApp for the latest updates!