हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा के लंबागांव क्षेत्र में किसानों की एक अनोखी सामूहिक पहल आज ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी है। मई 2023 में स्थापित लंबागांव मिल्क फेड फार्मर प्रोड्यूसर एफपीओ ने न केवल किसानों की आय बढ़ाई है, बल्कि महिला सशक्तिकरण और संगठित खेती का सफल मॉडल भी पेश किया है। ब्लॉक लंबागांव, तहसील जयसिंहपुर के सुआ गांव में शुरू हुए इस संगठन से आज 500 से अधिक किसान जुड़े हुए हैं और सामूहिक प्रयासों से अपनी आजीविका मजबूत कर रहे हैं।

इस एफपीओ की सबसे खास बात इसका महिला नेतृत्व है। 10 निदेशकों में से 5 महिलाएं हैं और संचालन की मुख्य जिम्मेदारी भी महिलाओं के हाथों में है। यह पहल ग्रामीण महिलाओं की निर्णय क्षमता और नेतृत्व कौशल का मजबूत उदाहरण बनकर उभरी है। एफपीओ की स्थापना में कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के पूर्व कुलपति प्रो. डॉ. अशोक कुमार सरयाल की अहम भूमिका रही। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने गांव लौटकर किसानों को संगठित किया और वैज्ञानिक खेती की दिशा में मार्गदर्शन दिया। उनके अनुसार, क्षेत्र में आवारा पशुओं और बंदरों की समस्या के कारण किसान खेती छोड़ने को मजबूर हो रहे थे। ऐसे में एफपीओ ने हल्दी और अदरक जैसी सुरक्षित व लाभकारी फसलों की खेती को बढ़ावा दिया।

वर्ष 2018 में कृषि विभाग के सहयोग से लगभग 7.5 हेक्टेयर क्षेत्र में सोलर फेंसिंग लगाई गई, जिस पर 20.50 लाख रुपये खर्च हुए। इसमें 17.50 लाख रुपये कृषि विभाग और 3 लाख रुपये किसानों ने मिलकर लगाए। इससे फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई और किसान दोबारा जैविक गेहूं, मक्का और हल्दी की खेती की ओर लौटे। कृषि विभाग समय-समय पर जैविक खेती, खाद प्रबंधन और कीट नियंत्रण पर प्रशिक्षण दे रहा है। किसानों को डेमोंस्ट्रेशन के लिए बीज, खाद और कृषि यंत्र भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। हाल ही में कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर और एफपीओ के बीच एक एमओयू भी हुआ है, जिससे किसानों को लगातार वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग मिल रहा है।

हिमाचल सरकार द्वारा जैविक कच्ची हल्दी को 90 रुपये प्रति किलो के समर्थन मूल्य पर खरीदे जाने से किसानों को सीधा फायदा हुआ है। पहले हल्दी 30-35 रुपये प्रति किलो बिकती थी, लेकिन अब बेहतर बाजार और सरकारी योजनाओं के सहयोग से उचित मूल्य मिल रहा है। जिला निगरानी समिति, जिसकी अध्यक्षता उपायुक्त कांगड़ा करते हैं, ने एफपीओ को जैविक हल्दी, जैविक अदरक की खेती और दूध व दुग्ध उत्पादों के संग्रह और वितरण की अनुमति दी है।

वर्तमान में एफपीओ प्रतिदिन 150 से 200 लीटर दूध एकत्र कर 100 से अधिक परिवारों तक घर-द्वार पर दूध, पनीर और दही उपलब्ध करा रही है। इससे कई लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है, जबकि डेयरी किसानों के माध्यम से युवाओं को अप्रत्यक्ष रोजगार भी प्राप्त हो रहा है। बड़े डेयरी किसान प्रतिदिन 35-40 लीटर और छोटे किसान 5-10 लीटर दूध बेचकर अपनी आय में 7,000 से 50,000 रुपये प्रतिमाह तक की बढ़ोतरी कर रहे हैं।

कृषि उपनिदेशक कांगड़ा, पालमपुर कुलदीप धीमान के अनुसार, हल्दी की खेती ने जिले के किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है। वहीं उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा का कहना है कि सरकार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने की पहल के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। लंबागांव का यह एफपीओ इस बात का प्रमाण है कि संगठित प्रयास, सही मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं के प्रभावी उपयोग से किसानों की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की जा सकती है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे ऐसी योजनाओं से जुड़कर आगे बढ़ें और आत्मनिर्भर बनें।
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