Himachal: हिमाचल में मजदूरों की विशाल हड़ताल से थम गया कामकाज, शिमला में कूड़े के ढेर, कई सेवाएं पूरी तरह प्रभावित

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और राष्ट्रीय फैडरेशनों के संयुक्त मंच के आह्वान पर सीटू के बैनर तले हिमाचल प्रदेश में मजदूरों ने एक विशाल प्रदेशव्यापी हड़ताल की, जिसका असर पूरे राज्य में साफ तौर पर देखने को मिला। इस हड़ताल में आंगनबाड़ी, मिड-डे मील, मनरेगा, निर्माण मजदूर, बीआरओ, आउटसोर्स और ठेका कर्मियों सहित बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने भाग लिया। इसके अलावा बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ के औद्योगिक मजदूर, स्वास्थ्य विभाग के वार्ड अटेंडेंट, सुरक्षा और सफाई कर्मी, डाटा एंट्री ऑपरेटर, ईसीजी और नर्सिंग स्टाफ, 108 और 102 एम्बुलेंस कर्मी, पनबिजली परियोजनाओं और सतलुज जल विद्युत निगम के कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल रहे। होटल, रेहड़ी-फड़ी, विशाल मेगामार्ट, कालीबाड़ी मंदिर, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और एसबीआई के ठेका मजदूरों ने भी काम बंद कर हड़ताल का समर्थन किया। इसके साथ ही एचपीएमआरए, एनजेडआईईए और बेफी जैसे कर्मचारी संगठनों ने भी प्रदर्शनों में भाग लिया।

इस हड़ताल को हिमाचल किसान सभा, जनवादी महिला समिति, एसएफआई, डीवाईएफआई, एआईएलयू, पेंशनर्ज एसोसिएशन, दलित शोषण मुक्ति मंच और जन विज्ञान आंदोलन का भी पूरा समर्थन मिला। मजदूर-किसान एकता को मजबूत करते हुए कई ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों ने देहात बंद किया और जिला व ब्लॉक मुख्यालयों पर आयोजित प्रदर्शनों में शामिल होकर अपनी एकजुटता दिखाई।

राजधानी शिमला में सीटू के नेतृत्व में आईजीएमसी, केएनएच, रिपन, चमियाणा अस्पताल, मानसिक रोग अस्पताल, आयुर्वेदिक अस्पताल और नगर निगम से जुड़े सैकड़ों मजदूरों ने हड़ताल कर कामकाज ठप्प कर दिया। सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा और महासचिव प्रेम गौतम ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की और मजदूरों की मांगों को जल्द पूरा करने की मांग उठाई। मजदूरों ने लेबर कोड रद्द करने, न्यूनतम वेतन 30,000 रुपए करने, आउटसोर्स और ठेका कर्मियों को नियमित करने, मनरेगा को मजबूत करने, किसानों की कर्ज माफी, एमएसपी की गारंटी और निजीकरण पर रोक लगाने जैसी कई प्रमुख मांगें उठाईं।

हड़ताल का सबसे ज्यादा असर शिमला की सफाई व्यवस्था पर देखने को मिला। सैहब कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से शहर में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण पूरी तरह बंद हो गया, जिससे वार्डों और कलेक्शन सेंटरों पर कूड़े के ढेर लग गए। कई जगह कचरा सड़कों पर फैल गया और शहर में गंदगी का माहौल बन गया। प्रशासन ने केवल रिज और माल रोड पर नियमित कर्मचारियों से सफाई करवाई, लेकिन अन्य क्षेत्रों में स्थिति खराब बनी रही। हालांकि उम्मीद जताई जा रही है कि कर्मचारी शुक्रवार से काम पर लौट सकते हैं।

ठियोग में विभिन्न यूनियनों ने बाजार में रैली निकाली और विश्रामगृह के पास करीब एक घंटे तक चक्का जाम किया। इस दौरान सेब उत्पादक संघ, मिड-डे मील वर्कर्स और आशा वर्कर्स ने भी प्रदर्शन में भाग लिया। बिजली बोर्ड के कर्मचारियों ने भी निजीकरण के विरोध में पैन डाउन स्ट्राइक कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

रामपुर बुशहर में मजदूरों, किसानों और ग्रामीण श्रमिकों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार रैली निकाली। किसान सभा के राज्य महासचिव राकेश सिंघा और सीटू जिला अध्यक्ष कुलदीप सिंह ने प्रदर्शन को संबोधित किया। बिजली संशोधन विधेयक 2025 और स्मार्ट मीटरिंग के विरोध में बिजली बोर्ड के कर्मचारियों, इंजीनियरों और पेंशनरों ने भी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और टूल डाउन हड़ताल की। करीब 100 कर्मचारियों ने इस दौरान सरकार के खिलाफ विरोध जताया।

For advertisements inquiries on HIM Live TV, Kindly contact us!

Connect with us on Facebook and WhatsApp for the latest updates!