अंतर्राष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव में भाग लेने के लिए सराज घाटी के आराध्य देवता मार्कंडेय ऋषि और देवता घटोत्कच कोटलू अपने पारंपरिक लाव-लश्कर के साथ यात्रा पर निकल चुके हैं। मंगलवार को देव यात्रा के दौरान जब देवताओं का पंडोह में आगमन हुआ तो स्थानीय लोगों ने श्रद्धा और उत्साह के साथ उनका विधिवत और भव्य स्वागत किया। देव ध्वनियों और जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
पंडोह में देवताओं के स्वागत को लेकर भक्तों में खास उत्साह देखने को मिला। हर वर्ष की तरह इस बार भी देवताओं और उनके साथ चल रहे देवलुओं के लिए भोजन की विशेष व्यवस्था की गई। देव परंपरा के अनुसार यह सेवा पिछले करीब 27 वर्षों से लगातार पंडोह में निभाई जा रही है, जो क्षेत्र के लोगों की गहरी आस्था और देव संस्कृति से जुड़ाव को दर्शाती है।
देवता के पुजारी भूमेराम ने बताया कि देवता मार्कंडेय ऋषि और घटोत्कच कोटलू 28 जनवरी को अपनी-अपनी कोठी से महाशिवरात्रि यात्रा के लिए रवाना हुए थे। यह धार्मिक यात्रा लगभग 40 से 45 दिनों तक चलेगी। इस दौरान देवता रास्ते में पड़ने वाले गांवों में भक्तों के घर-घर जाकर दर्शन देंगे और क्षेत्रवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना करेंगे।
उन्होंने बताया कि देवता 15 फरवरी को पड्डल मैदान में अंतर्राष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव में विधिवत रूप से शामिल होंगे। महोत्सव संपन्न होने के बाद देवता पुनः अपनी-अपनी कोठी की ओर लौटेंगे। इस दौरान संपूर्ण क्षेत्र देव परंपराओं और धार्मिक उल्लास से सराबोर रहेगा।
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