Himachal: IAS डॉ. ललित जैन ने रचा इतिहास, राष्ट्रपति के सामने मिली पीएचडी की उपाधि, सेक्शन 118 पर किया अनोखा शोध

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हिमाचल प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी डॉ. ललित जैन को विधि विषय में डॉक्टरेट (पीएचडी) की उपाधि से सम्मानित किया गया है। यह उपाधि उन्हें गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर में आयोजित दीक्षांत समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति में प्रदान की गई। समारोह में पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया भी मौजूद रहे। वर्तमान में डॉ. ललित जैन भारत सरकार में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर गृह मंत्रालय के अंतर्गत निदेशक, जनगणना संचालन एवं नागरिक पंजीकरण के पद पर कार्यरत हैं।

डॉ. ललित जैन का शोध प्रबंध हिमाचल प्रदेश भू-स्वामित्व एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1972 की धारा 118 के कारोबार सुगमता और उद्यमशीलता के इरादों पर प्रभाव विषय पर आधारित है। इस शोध में भूमि सुधार, कारोबार की सुगमता, पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और सतत उद्यमशीलता जैसे अहम मुद्दों का गहन कानूनी और नीतिगत विश्लेषण किया गया है, जिसमें हिमाचल प्रदेश पर विशेष फोकस रखा गया है। डॉ. ललित जैन सेक्शन 118 पर शोध करने वाले देश के पहले आईएएस अधिकारी माने जा रहे हैं।

शैक्षणिक दृष्टि से डॉ. ललित जैन राजनीति विज्ञान, एलएलबी, एलएलएम और एमबीए में उच्च शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं। भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयन से पहले उन्होंने अधिवक्ता के रूप में भी सेवाएं दी हैं। वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षित प्रशासक और प्रख्यात वक्ता हैं, जिन्होंने देश और विदेश में कई सम्मेलनों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और नीति मंचों पर भाग लिया है। उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों में जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण कानून, भूमि प्रशासन और सतत विकास जैसे विषयों पर व्याख्यान दिए हैं।

पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. ललित जैन को पर्यावरण नेतृत्व पुरस्कार सहित कई राज्य और राष्ट्रीय स्तर के सम्मान मिल चुके हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय वित्तपोषित परियोजनाओं का नेतृत्व किया है और संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलनों समेत कई वैश्विक मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व किया है। पीएचडी की उपाधि उनके शैक्षणिक और प्रशासनिक करियर की एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, जिससे साक्ष्य आधारित नीति निर्माण और सतत शासन में उनकी भूमिका और मजबूत होगी।

डॉ. ललित जैन के पिता शशिपाल जैन का भी पत्रकारिता जगत से गहरा संबंध रहा है। वह पंजाब के खरड़ से पंजाब केसरी के प्रतिनिधि रहे हैं और वर्ष 1970 से अब तक इस संस्थान से जुड़े हुए हैं। आईएएस 2011 बैच के अधिकारी डॉ. ललित जैन ने कहा कि शिक्षा जितनी अधिक हासिल की जाए, उतना ही अच्छा होता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा जीवन के हर मोड़ पर काम आती है और इसमें निरंतरता बेहद जरूरी है। विशेष बातचीत में उन्होंने बताया कि आईएएस सेवा उन्हें उच्च शिक्षा हासिल करने का अवसर देती है और उनके द्वारा अर्जित ज्ञान सरकार और नीति निर्माण में उपयोगी साबित होगा। उन्होंने कहा कि सेक्शन 118 पर किया गया उनका शोध वर्तमान समय का ज्वलंत विषय है और इससे सरकार को ठोस निर्णय लेने में मदद मिलेगी।

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