Shimla: टनल बनी आफत: शिमला के चलौंठी में छह मंजिला इमारत खतरे में, ठंड में 15 परिवार सड़कों पर

राजधानी शिमला में विकास और विनाश के बीच की रेखा एक बार फिर धुंधली होती नजर आ रही है। भट्टाकुफर की घटना के बाद जख्म अभी भरे भी नहीं थे कि अब चलौंठी में टनल निर्माण के चलते एक छह मंजिला रिहायशी इमारत खतरे की जद में आ गई है। यातायात को सुगम बनाने के लिए बनाई जा रही टनल अब लोगों के घरों के लिए संकट बनती दिख रही है। शुक्रवार की हाड़ कंपाने वाली ठंड में करीब 15 परिवारों को अपना घर छोड़कर खुले आसमान के नीचे रात गुजारनी पड़ी।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह स्थिति अचानक पैदा नहीं हुई। पिछले तीन दिनों से अनंतराम नामक व्यक्ति के इस छह मंजिला मकान में दरारें दिखाई दे रही थीं। प्रभावित परिवारों ने समय रहते फोरलेन निर्माण कंपनी और प्रशासन को इसकी सूचना दी थी, लेकिन मौके पर पहुंचे विशेषज्ञों ने जांच के बाद इमारत को सुरक्षित बताकर चिंता की बात नहीं कही। शुक्रवार रात जैसे-जैसे दरारें बढ़ीं और जमीन धंसने का खतरा गहराया, तब जाकर प्रशासन हरकत में आया।

शुक्रवार रात करीब 10 बजे पुलिस और निर्माण कंपनी के कर्मचारियों ने आनन-फानन में इमारत खाली कराने के निर्देश दिए। हालात ऐसे थे कि छोटे बच्चे और बुजुर्ग कड़ाके की ठंड में ढली-संजौली बाईपास पर बैठने को मजबूर हो गए। रहने की कोई वैकल्पिक व्यवस्था न होने से लोगों ने सड़क किनारे आग जलाकर रात काटी। देर रात करीब 11 बजे एडीएम पंकज शर्मा मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया, लेकिन तब तक लोगों का गुस्सा और डर दोनों चरम पर पहुंच चुका था।

इमारत की हालत और सड़क पर आई दरारों को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से ढली-संजौली बाईपास को पूरी तरह वाहनों के लिए बंद कर दिया है। मौके पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि किसी तरह की अनहोनी न हो।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह सिर्फ एक मकान तक सीमित मामला नहीं है। टनल निर्माण के दौरान हो रही भारी खुदाई और कंपन से चलौंठी क्षेत्र के अन्य मकानों की नींव भी प्रभावित हो रही है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि निर्माण कार्य की तकनीक में सुधार नहीं किया गया, तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

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