भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने मुख्यमंत्री, उनके मंत्रिमंडल सहयोगियों और कांग्रेस विधायकों पर बीपीएल सूची से गरीब परिवारों के नाम हटाकर उनके अधिकारों पर हमला करने का गंभीर आरोप लगाया है। शिमला से जारी बयान में डॉ. बिंदल ने कहा कि सरकार ने बीपीएल चयन के लिए नए नियम बनाकर और बिना पारदर्शी प्रक्रिया अपनाए जिलाधीशों के माध्यम से आनन-फानन में सूचियों से नाम काट दिए हैं।
डॉ. राजीव बिंदल का आरोप है कि कुछ जिलों में प्रकाशित नई बीपीएल सूचियों में करीब 90 फीसदी तक पुराने बीपीएल परिवारों के नाम गायब कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस पूरी चयन प्रक्रिया में पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों को न तो विश्वास में लिया गया और न ही किसी तरह की बैठक कर जमीनी हकीकत जानने की कोशिश की गई। भाजपा ने तथ्यों के आधार पर यह आरोप लगाए हैं और सरकार से जवाब की मांग की है।
उन्होंने दावा किया कि नाहन विकास खंड सहित कई पंचायतों में वास्तविक गरीब परिवारों के नाम बीपीएल सूची से हटाए गए हैं। इनमें आशा देवी पत्नी जिया राम, सद्दीक पुत्र नूर मुहम्मद, पार्वती देवी पत्नी स्वर्गीय महिपाल, रजनी पत्नी स्वर्गीय राजवीर, अनीता देवी पत्नी स्वर्गीय मान सिंह, निश्चा देवी पत्नी स्वर्गीय सलिन्द्र सिंह, जतीन चौहान पत्नी स्वर्गीय निर्मल सिंह, नीलम ठाकुर पत्नी स्वर्गीय सुरजन सिंह, अलखदेव सिंह पुत्र पनराम, राजेंद्र सिंह पुत्र स्वर्गीय बलदेव सिंह, बनारसी दास पुत्र आशुराम, जाहिदा पत्नी स्वर्गीय नजीर, कमला देवी पत्नी हंसराज और जद्वी देवी पत्नी स्वर्गीय ओम पाल सिंह सहित दर्जनों नाम शामिल हैं।
डॉ. बिंदल ने आरोप लगाया कि प्रदेश के इतिहास में पहली बार अत्यंत निर्धन परिवारों के साथ ऐसा तानाशाहीपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस सरकार जनहित के असली मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए भूख हड़ताल जैसे राजनीतिक नाटक कर रही है। उनके अनुसार प्रदेश में मनरेगा के काम लगभग ठप पड़े हैं और केंद्र सरकार की वी.बी.-जी राम जी योजना को भी अब तक शुरू नहीं किया गया है।
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