हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने नामी खाद्य कंपनियों के गुणवत्ता दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नौणी क्षेत्र के मंडी मानवा गांव में एक परिवार को उस समय बड़ा झटका लगा, जब बच्चे के लिए खरीदी गई चॉकलेट में जिंदा कीड़ा रेंगता हुआ मिला।
जानकारी के अनुसार, भाखड़ा विस्थापित सभा के प्रधान रमेश चंद कौंडल ने अपने बच्चे शिवा के लिए स्थानीय दुकान से पांच रुपये की चॉकलेट खरीदी थी। जब उन्होंने बच्चे को चॉकलेट देने के लिए उसका पैकेट खोला, तो चॉकलेट की सतह पर एक जिंदा कीड़ा रेंगता हुआ दिखाई दिया। इतना ही नहीं, चॉकलेट पर कीड़े के अंडे भी मौजूद थे। यह देखकर परिवार के होश उड़ गए और उन्होंने तुरंत बच्चे को चॉकलेट देने से रोक दिया।
परिजनों का कहना है कि यदि बच्चे ने गलती से इस दूषित चॉकलेट का सेवन कर लिया होता, तो उसकी सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता था। इस घटना के बाद परिवार में डर का माहौल है और नामी ब्रांड के उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि चॉकलेट के रैपर पर एक्सपायरी डेट मई 2026 दर्ज है, यानी उत्पाद अभी भी वैध अवधि में था। इसके बावजूद चॉकलेट के अंदर कीड़ा और उसके अंडे मिलना कंपनी के निर्माण और स्टोरेज सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
रमेश चंद कौंडल ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दूषित चॉकलेट को सबूत के तौर पर सुरक्षित रखने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि वे इस मामले में न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे और खाद्य सुरक्षा विभाग से जांच की मांग करेंगे।
इस मामले पर खाद्य सुरक्षा विभाग के सहायक आयुक्त महेश कश्यप ने भी संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा कि विभाग जल्द ही चॉकलेट के सैंपल भरेगा और जांच के बाद दोषी पाए जाने पर संबंधित कंपनी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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