उपमंडल धीरा के अंतर्गत पंचायत देवी के रहने वाले सूबेदार रीपिम चौधरी (45) को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। रीपिम चौधरी 3 डोगरा रेजिमेंट में तैनात थे और सिक्किम की बर्फीली पहाड़ियों में चीन बॉर्डर पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। जानकारी के अनुसार सितंबर 2024 में ड्यूटी के दौरान उन्हें जीभ में बर्फ लगने से संक्रमण हो गया था, जो धीरे-धीरे गंभीर होता चला गया। इसके बाद उन्हें कमांड अस्पताल कोलकाता में भर्ती कराया गया, जहां उनका ऑपरेशन भी हुआ, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हो सका। बाद में उन्हें चंडीगढ़ के कमांड अस्पताल में शिफ्ट किया गया, जहां पिछले 10 महीनों से उनका इलाज चल रहा था। इसी दौरान शनिवार रात उन्होंने दम तोड़ दिया।
रविवार को तिरंगे में लिपटा उनका पार्थिव शरीर जब उनके पैतृक गांव देवी पहुंचा, तो पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिजन उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए एकत्र हुए। उनकी पत्नी अंजना ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी, जबकि लोगों ने भारत माता की जय के नारे लगाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। भेडू महादेव श्मशान घाट में उनके छोटे बेटे दक्ष ने उन्हें मुखाग्नि दी और सेना के जवानों ने सलामी देते हुए उन्हें अंतिम विदाई दी।
रीपिम चौधरी वर्ष 1998 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे और करीब 27 वर्षों तक देश की सेवा करते रहे। वह अगले वर्ष जनवरी में सेवानिवृत्त होने वाले थे, लेकिन इससे पहले ही उनका निधन हो गया। करीब डेढ़ साल से वह बर्फ के संक्रमण से जूझ रहे थे। उनके निधन से पूरे क्षेत्र में गहरा शोक है और लोग उनके समर्पण को याद कर रहे हैं।
उनका परिवार भी देश सेवा में अग्रणी रहा है। उनके पिता स्वर्गीय रमेश चंद भारतीय सेना से हवलदार पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उनके बड़े बेटे तनिष्क चौधरी का हाल ही में एनडीए में चयन हुआ है और वह पुणे में प्रशिक्षण ले रहा है, जबकि छोटा बेटा दक्ष पांचवीं कक्षा में पढ़ता है। परिवार के अन्य सदस्य भी सेना और नेवी में सेवाएं दे चुके हैं।
उनके अंतिम संस्कार में स्थानीय लोग, सेना के अधिकारी और जवान बड़ी संख्या में मौजूद रहे। सभी ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी और देश के प्रति उनके समर्पण को याद किया।
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