Himachal: हिमाचल के स्मार्ट शहरों की नींव जापान और कोरिया से: मंत्री विक्रमादित्य सिंह का बड़ा शहरी विकास विज़न

हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह इन दिनों जापान और दक्षिण कोरिया के आधिकारिक दौरे पर हैं। यह दौरा हिमाचल प्रदेश के भविष्य के शहरी विकास और डिजास्टर मैनेजमेंट को लेकर काफी अहम माना जा रहा है। गुरुवार को उन्होंने टोक्यो में टोक्यो मेट्रोपोलिटन गवर्नमेंट भवन में उपराज्यपाल मात्सुमोटो अकीको से मुलाकात की। इस बैठक में मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियों और आपदा संवेदनशीलता को देखते हुए कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। इनमें डिजास्टर मैनेजमेंट, भूकंपरोधी इमारतों का निर्माण, स्मार्ट पार्किंग सिस्टम और ठोस कचरा प्रबंधन जैसे विषय प्रमुख रहे। उन्होंने इन क्षेत्रों में टोक्यो मेट्रोपोलिटन अथॉरिटी से तकनीकी सहयोग और विशेषज्ञ सुझाव भी मांगे हैं।

मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने इस अवसर पर कहा कि प्रदेश सरकार समग्र विकास के लिए विश्व की बेहतरीन तकनीकों और योजनाओं को अपनाने में पीछे नहीं रहेगी। उनका स्पष्ट उद्देश्य हिमाचल को न केवल सुंदर और सुरक्षित बनाना है, बल्कि तकनीक और प्रबंधन के क्षेत्र में भी उसे विकसित राज्यों की श्रेणी में शामिल करना है। इस आधिकारिक दौरे पर उनके साथ विधायक हरीश जनारथा, राकेश कालिया, अजय सोलंकी, आशीष बुटेल और शहरी विकास विभाग के अधिकारी भी शामिल हैं।

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इस अंतरराष्ट्रीय दौरे के दौरान हिमाचल की टीम ने जापान और दक्षिण कोरिया के कई शहरों का दौरा किया। वहां की आधुनिक शहरी योजनाओं और नागरिक सुविधाओं का बारीकी से अध्ययन किया गया। उन्होंने यह देखा कि कैसे सुनियोजित ढंग से हर घर तक बिजली, पानी और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई गई हैं। साथ ही, ठोस कचरा निपटान, ट्रैफिक नियंत्रण, स्मार्ट पार्किंग और फूड प्रोसेसिंग जैसी सुविधाएं भी उनके लिए प्रेरणादायक रहीं। टीम ने शहरी ढलानों की मजबूती, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग, ट्रैफिक मैनेजमेंट और स्मार्ट सिटी योजनाओं में इस्तेमाल हो रही अत्याधुनिक तकनीकों पर भी चर्चा की।

करीब आठ दिन की इस विदेश यात्रा का अब अंतिम चरण चल रहा है और प्रतिनिधिमंडल 27 जुलाई को शिमला लौटेगा। माना जा रहा है कि इस दौरे में जो अनुभव और विचार सामने आए हैं, उन्हें प्रदेश में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स के तहत लागू किया जाएगा। सरकार डिजास्टर मैनेजमेंट, भूकंपरोधी निर्माण, स्मार्ट ट्रैफिक कंट्रोल और ठोस कचरा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नई तकनीकों और विशेषज्ञता का लाभ उठाने की योजना पर कार्य कर रही है। इस दौरे से न केवल शैक्षिक और तकनीकी लाभ मिला है, बल्कि हिमाचल प्रदेश के शहरी विकास की दिशा को लेकर एक स्पष्ट रणनीति भी उभरकर सामने आई है।

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