हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को शिमला के चौड़ा मैदान में पैंशनर्ज संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले बड़ी संख्या में पैंशनर एकत्रित हुए और अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। पैंशनरों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए वादा खिलाफी और पैंशनर विरोधी नीतियां अपनाने के गंभीर आरोप लगाए। प्रदर्शन के दौरान पैंशनरों ने कहा कि सरकार उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज कर रही है।
समिति के अनुसार, इससे पहले 28 नवम्बर 2025 को धर्मशाला के जोरावर स्टेडियम में भी हजारों पैंशनरों ने रैली निकाली थी। उस समय मुख्यमंत्री ने विधानसभा में पैंशनरों के शिष्टमंडल को बातचीत के लिए बुलाने का आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक इस संबंध में कोई बैठक नहीं हुई। पैंशनरों का आरोप है कि प्रदेश सरकार वित्तीय संकट का हवाला देकर महंगाई भत्ता, एरियर और अन्य वित्तीय लाभों का भुगतान रोक रही है, जबकि दूसरी ओर जनप्रतिनिधियों के वेतन-भत्तों और आयोगों के पदाधिकारियों की पैंशन में बढ़ोतरी की जा रही है।
पैंशनर्ज संयुक्त संघर्ष समिति ने अपनी प्रमुख मांगों में 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 तक सेवानिवृत्त कर्मचारियों की ग्रैच्युटी, लीव इनकैशमेंट, कम्यूटेशन और संशोधित पैंशन का भुगतान करने की मांग उठाई है। इसके अलावा 13 प्रतिशत महंगाई भत्ता और लंबित एरियर का भुगतान, साथ ही विभिन्न बोर्ड-निगमों, परिवहन, विद्युत बोर्ड, विश्वविद्यालय और अन्य विभागों के पैंशनरों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की मांग भी प्रमुख रूप से शामिल है।
समिति के अध्यक्ष सुरेश ठाकुर ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही पैंशनरों के शिष्टमंडल को बातचीत के लिए नहीं बुलाया गया, तो जिस दिन विधानसभा में बजट पेश किया जाएगा, उस दिन हजारों पैंशनर विधानसभा के बाहर उग्र प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि पैंशनर अपने अधिकारों के लिए आंदोलन जारी रखेंगे और अगला प्रदर्शन पहले से भी बड़ा होगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक ओर सरकार वित्तीय संकट का हवाला दे रही है, वहीं दूसरी ओर सरकारी विभागों में करोड़ों रुपये की गाड़ियों की खरीद की जा रही है, जिसे पैंशनर दोहरी नीति मानते हैं।
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