Himachal: पंजाब से बेहतर है हिमाचल की आर्थिक स्थिति: मुख्यमंत्री सुक्खू, ओपीएस से लेकर भाजपा पर साधा निशाना

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र के प्रवास के दौरान राज्य की आर्थिक स्थिति और विभिन्न सरकारी योजनाओं को लेकर कई अहम बातें कही। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिति पंजाब से कहीं बेहतर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार ने पंजाब में कर्मचारियों को ओपीएस देने का वादा किया था, लेकिन चुनाव नजदीक आने के बावजूद आज तक वहां के सरकारी कर्मचारियों को यह सुविधा नहीं मिल पाई। इसके विपरीत हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने अपनी पहली ही कैबिनेट बैठक में कर्मचारियों को ओपीएस देने का फैसला लिया। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश की संपदा को किसी भी कीमत पर लुटने नहीं दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि उन्होंने और उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने जीवन में संघर्ष किया है और आम लोगों की परेशानियों को अच्छी तरह समझते हैं। इसी वजह से सरकार लोगों के कल्याण के लिए योजनाएं बना रही है। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2023 में आई प्राकृतिक आपदा के दौरान वह स्वयं और उपमुख्यमंत्री ग्राउंड जीरो पर मौजूद रहे और प्रभावित परिवारों की मदद की। उस समय राज्य सरकार के सामने 23 हजार प्रभावित परिवारों को फिर से बसाने और करीब 75 हजार फंसे पर्यटकों को सुरक्षित घर पहुंचाने की बड़ी चुनौती थी। सरकार ने सभी पर्यटकों को सुरक्षित निकालने के साथ ही 48 घंटे के भीतर बिजली और पानी की अस्थायी व्यवस्था बहाल कर दी थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक चुनौतियों के बावजूद राज्य सरकार ने आपदा प्रभावित परिवारों की मदद के लिए कई नियमों में बदलाव किए। पहले पूरी तरह क्षतिग्रस्त घर के लिए डेढ़ लाख रुपये की सहायता मिलती थी, जिसे बढ़ाकर सात लाख रुपये कर दिया गया। उन्होंने कहा कि जब राज्य प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा था, उसी समय राजनीतिक संकट भी सामने आ गया। कुटलैहड़ की जनता का आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि लोगों और देवी-देवताओं के आशीर्वाद से कांग्रेस के विधायकों की संख्या फिर से 40 हो गई है।

भाजपा पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने चुनाव जीतने के लिए जनता के पैसे का दुरुपयोग किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अपने मित्रों को लाभ पहुंचाने के लिए पूर्व सरकार ने करीब एक हजार करोड़ रुपये की लागत से कई भवन बनवाए, जो आज खाली पड़े हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल के वीरों ने देश के लिए चार परमवीर चक्र जीते हैं, लेकिन आज युवाओं को अग्निवीर योजना के तहत चार साल बाद ही सेवानिवृत्त किया जा रहा है। उन्होंने मनरेगा और आरडीजी से जुड़े मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि हिमाचल को मिलने वाली आर्थिक सहायता में भी कमी आई है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछली भाजपा सरकार को आरडीजी और जीएसटी कंपनसेशन के रूप में करीब 70 हजार करोड़ रुपये मिले थे, जबकि वर्तमान सरकार को अब तक केवल 17 हजार करोड़ रुपये ही मिले हैं। उन्होंने कहा कि यदि वर्तमान सरकार को भी उतनी ही राशि मिलती, तो प्रदेश पर आज एक रुपये का भी कर्ज नहीं होता। इसके बावजूद सरकार हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है।

शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार के समय प्रदेश गुणात्मक शिक्षा के मामले में 21वें स्थान पर पहुंच गया था, लेकिन अब प्रदेश पांचवें स्थान पर आ गया है। उन्होंने बताया कि बेहतर शिक्षा के लिए प्रदेश में सीबीएसई स्कूल खोले जा रहे हैं और अगले दो महीनों के भीतर इनमें सभी शिक्षकों की नियुक्ति भी कर दी जाएगी। स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार की बात करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सरकार तीन हजार करोड़ रुपये हाई-एंड मेडिकल तकनीक पर खर्च करने की योजना बना रही है। साथ ही कुटलैहड़ क्षेत्र के स्वास्थ्य संस्थानों में पहले की तुलना में अधिक डॉक्टर तैनात किए गए हैं और भविष्य में और डॉक्टर भेजे जाएंगे।

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