Himachal Pradesh में हाल के वर्षों में आई प्राकृतिक आपदाओं और उससे हुए भारी नुकसान का मुद्दा अब संसद तक पहुंच गया है। राज्यसभा में कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी और सांसद Rajni Patil ने यह मामला उठाते हुए केंद्र सरकार पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में आपदाओं के कारण हिमाचल प्रदेश को भारी नुकसान झेलना पड़ा है। खासतौर पर Kullu-Manali क्षेत्र में कई सड़कें और रास्ते पूरी तरह बह गए, जिससे लोगों की आवाजाही और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ा।
रजनी पाटिल ने सदन में कहा कि आपदा के बाद Narendra Modi ने भी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया था और 1500 करोड़ रुपये की सहायता देने की घोषणा की थी। लेकिन उनके अनुसार अब तक उस घोषणा के तहत एक भी रुपया प्रदेश को नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि हिमाचल जैसे पर्वतीय राज्य को आपदाओं से उबरने के लिए केंद्र की मदद की बेहद जरूरत है।
इसी मुद्दे पर प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री Vikramaditya Singh ने भी सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए रजनी पाटिल का समर्थन किया। उन्होंने लिखा कि प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के रूप में रजनी पाटिल लगातार हिमाचल की आवाज राष्ट्रीय स्तर पर उठा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पर्वतीय और राजस्व घाटा वाले राज्यों को दी जा रही सहायता को अचानक बंद करना संघीय ढांचे और छोटे राज्यों के अधिकारों के साथ अन्याय है।
वहीं उपमुख्यमंत्री Mukesh Agnihotri ने भी राज्यसभा में हिमाचल के मुद्दों को मजबूती से उठाने के लिए रजनी पाटिल का आभार जताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि हिमाचल प्रदेश हर साल आपदाओं और बाढ़ की मार झेलता है, लेकिन इसके बावजूद भी प्रदेश को केंद्र से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की घोषणाओं के बाद भी हिमाचल को उसका पूरा अधिकार नहीं मिल पा रहा है।
मुकेश अग्निहोत्री ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि आगामी मानसून को ध्यान में रखते हुए हिमाचल प्रदेश को आवश्यक राहत और सहायता प्रदान करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में आने वाली आपदाओं से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।
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