नूरपुर क्षेत्र में पेट्रोल पंप के लिए अंतिम एनओसी जारी करने के नाम पर रिश्वत मांगने के मामले में सीबीआई ने जांच तेज कर दी है। इस मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी ने चंडीगढ़ और मोहाली में एक निजी कंसल्टैंट के ठिकानों पर छापेमारी की है। छापेमारी के दौरान मोहाली स्थित आवास और चंडीगढ़ स्थित कार्यालय से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं। इस मामले में सीबीआई पहले ही एक आरोपी को गिरफ्तार कर चुकी है। आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 20 मार्च तक रिमांड पर भेज दिया गया है।
जानकारी के अनुसार नूरपुर क्षेत्र के एक पेट्रोल पंप संचालक ने 9 फरवरी 2026 को सीबीआई एंटी करप्शन ब्रांच (एसीबी) शिमला को शिकायत दी थी। शिकायत में बताया गया कि वर्ष 2020 में एक निजी पेट्रोलियम कंपनी की ओर से उन्हें पेट्रोल पंप की डीलरशिप दी गई थी और उसी साल उन्हें लैटर ऑफ इंटेंट भी जारी किया गया था।
पेट्रोल पंप स्थापित करने के लिए कई विभागों से एनओसी लेना जरूरी था। इसी प्रक्रिया के तहत वर्ष 2021 में एक प्रोविजनल एनओसी जारी की गई थी और इसके बाद वर्ष 2023 में एक और प्रोविजनल एनओसी दी गई। शिकायत के अनुसार बाद में संबंधित प्राधिकरण ने अंतिम एनओसी के लिए आवेदन करने को कहा। जब पेट्रोल पंप संचालक संबंधित कार्यालय पहुंचे तो उन्हें चंडीगढ़ के एक निजी कंसल्टैंट के माध्यम से आवेदन करने की सलाह दी गई।
आरोप है कि अंतिम एनओसी जारी करने के बदले उनसे 10 लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई। सीबीआई द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई है। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि 5 लाख रुपये की आंशिक रकम लेने पर सहमति बन गई थी। इसके बाद सीबीआई ने शिकायत और सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7ए के तहत मामला दर्ज किया है।
सीबीआई अब इस पूरे मामले में शामिल अन्य अधिकारियों और व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस रिश्वत नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
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