Kangra: सिर्फ 5 साल पुरानी शाहपुर नगर पंचायत पर संकट, एक साल से न सचिव न जेई, दफ्तर भी शिफ्ट करने की तैयारी

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शाहपुर में करीब पांच साल पहले अस्तित्व में आई नगर पंचायत अब खुद अपने अस्तित्व के संकट से जूझती नजर आ रही है। बताया जा रहा है कि पिछले करीब एक साल से नगर पंचायत में न तो कोई नगर सचिव तैनात है, न ही जूनियर इंजीनियर और न ही क्लर्क मौजूद है। पूरा दफ्तर फिलहाल केवल एक आउटसोर्स सुपरवाइजर के सहारे चल रहा है, जिससे प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है।

जानकारी के अनुसार शाहपुर नगर पंचायत का काम फिलहाल जवाली नगर पंचायत के अधिकारियों और कर्मचारियों के अतिरिक्त प्रभार के सहारे चल रहा है। पिछले वर्ष यहां तैनात दोनों नियमित कर्मचारियों का तबादला कर दिया गया था, जबकि नगर सचिव सेवानिवृत्त हो गए थे। तब से करीब डेढ़ साल का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक यहां किसी भी नियमित कर्मचारी की तैनाती नहीं हो पाई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस दिशा में विधायक स्तर पर भी कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए। वहीं अब नगर पंचायत कार्यालय को शाहपुर गोरडा स्थित मिनी सचिवालय में स्थानांतरित करने की तैयारी चल रही है, जिसे लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि इस स्थानांतरण का कोई ठोस औचित्य नजर नहीं आता।

लोगों ने यह भी आशंका जताई है कि कहीं शाहपुर तहसील कार्यालय की तरह नगर पंचायत का हाल भी खंडहर में तब्दील न हो जाए। करीब 25 साल पहले बनी शाहपुर तहसील का पुराना दफ्तर आज जर्जर हालत में खड़ा है। इसी तरह पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय सरदार प्रताप सिंह कैरो के समय बनी शाहपुर पंचायत, जो अब नगर पंचायत में बदल चुकी है, उसके भविष्य को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।

स्थानीय लोगों ने शाहपुर के विधायक और हिमाचल सरकार में उपमुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया से आग्रह किया है कि वे शाहपुर के लिए कोई नया कार्यालय लेकर आएं और नगर पंचायत के दफ्तर को बार-बार स्थानांतरित करने की बजाय स्थायी समाधान निकालें। साथ ही यह सुझाव भी दिया गया है कि विधायक अपनी रैत में स्थित सीडीपीओ कार्यालय और तहसील वेलफेयर ऑफिस को मिनी सचिवालय में स्थापित करें।

लोगों का कहना है कि पुराने तहसील भवन पर पिछले पांच सालों में लाखों रुपये खर्च किए गए, जिसमें तहसीलदार का क्वार्टर भी बनाया गया, लेकिन अब वह खाली पड़ा है। इसी तरह नगर पंचायत कार्यालय पर भी करीब 10 से 15 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। ऐसे में लोगों ने मांग की है कि इस कार्यालय के अस्तित्व को बनाए रखा जाए और इसे खंडहर बनने से बचाया जाए, ताकि नगर पंचायत और स्थानीय लोगों दोनों का हित सुरक्षित रह सके।

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